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NEET विवाद: सोनम वांगचुक का बड़ा दावा— शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विचार करेगी सरकार!

जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को लिखे पत्र में वांगचुक का खुलासा; बोले— जब तक प्रदर्शनकारी छात्रों की सुरक्षा की लिखित गारंटी नहीं मिलती, अनशन खत्म नहीं होगा

22 जुलाई, 2026, नई दिल्ली: नीट (NEET) परीक्षा के कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं को लेकर अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को एक बड़ा दावा किया है। वांगचुक के अनुसार, केंद्र सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वे जवाबदेही तय करने के प्रयासों के तहत केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर “सकारात्मक रूप से विचार” करेगी। देखें ट्वीट-

मंत्रियों ने अस्पताल में की मुलाकात

सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने बताया कि जब दोनों मंत्री उनसे अस्पताल में मिलने आए थे और उनसे अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त करने का आग्रह किया था, तब सरकार की ओर से यह भरोसा दिया गया था।

गौरतलब है कि स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश पर वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ से वे लगातार अपनी मांगें उठा रहे हैं।

मुआवजे और संसद में चर्चा का आश्वासन

वांगचुक के मुताबिक, सरकार ने परीक्षा से जुड़े विवादों के कारण मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने पर भी सहमति जताई है। इसके साथ ही, इस पूरे मामले पर संसद में एक सार्थक चर्चा कराने का भी आश्वासन दिया गया है ताकि परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही तय की जा सके।

अनशन खत्म करने के लिए वांगचुक ने रखी नई शर्त

हालांकि सरकार की ओर से मिले इन आश्वासनों के बावजूद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन पूरी तरह से खत्म करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने सरकार के सामने एक नई और सख्त शर्त रखी है:

“मैं अपना अनशन तभी समाप्त करूँगा जब सरकार यह स्पष्ट और पुख्ता आश्वासन देगी कि ‘नीट-विरोधी आंदोलन’ में शामिल किसी भी छात्र या प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। इन युवाओं का एकमात्र ‘अपराध’ सिर्फ एक निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली के लिए आवाज उठाना था।”

प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग की निंदा

पत्र में वांगचुक ने 20 जुलाई को आयोजित हुए “चलो संसद” मार्च का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग और कथित अत्याचारों के बावजूद छात्रों का यह मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण था। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदर्शन में शामिल किसी भी युवा को परेशान नहीं किया जाएगा।

उन्होंने अंत में कहा कि यदि सरकार प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा की गारंटी देती है, तो वे पूरे भरोसे के साथ अपना अनशन समाप्त कर देंगे, अन्यथा वे अपनी भूख हड़ताल जारी रखने के लिए मजबूर होंगे।

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