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प्रम्बानन में प्रधानमंत्री मोदी: सनातन विरासत के संरक्षण का ऐतिहासिक संकल्प

1,200 साल पुराने मंदिर परिसर का दौरा, भारत-इंडोनेशिया के अटूट संबंधों की गवाही

 9 जुलाई, योग्याकार्ता, इंडोनेशिया: इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर स्थित ‘प्रम्बानन मंदिर’ (Prambanan Temple) केवल पत्थरों का एक ढांचा नहीं, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों का जीवंत प्रमाण है। 9वीं शताब्दी में निर्मित यह विशाल मंदिर परिसर न केवल इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया की भव्य वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी है।

त्रिमूर्ति को समर्पित वास्तुकला

प्रम्बानन मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में मातराम साम्राज्य के संजय राजवंश के दौरान किया गया था। यह मंदिर हिंदू धर्म की ‘त्रिमूर्ति’—ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव)—को समर्पित है। परिसर का मुख्य आकर्षण भगवान शिव का मंदिर है, जो लगभग 47 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इसकी वास्तुकला में नक्काशीदार दीवारों पर रामायण के दृश्यों को इतनी बारीकी से उकेरा गया है कि पत्थर भी कहानियाँ सुनाते प्रतीत होते हैं।

इतिहास के थपेड़ों के बीच अडिग विरासत

1,200 वर्षों के लंबे इतिहास में, इस मंदिर ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। ज्वालामुखी के विस्फोटों, भीषण भूकंपों और सत्ता के बदलावों के कारण यह परिसर सदियों तक उपेक्षित रहा और खंडहरों में तब्दील हो गया था। हालांकि, 19वीं सदी में इसकी पुनः खोज हुई और पुरातत्वविदों ने ‘एनास्टिलोसिस’ (anastylosis) तकनीक का उपयोग करके इसे फिर से जीवंत किया। 1991 में, यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी।

भारत-इंडोनेशिया सांस्कृतिक सहयोग

हाल ही में, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रम्बानन मंदिर परिसर में एक संरक्षण परियोजना का शुभारंभ किया। यह पहल न केवल दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि साझा सांस्कृतिक धरोहर को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

 

किंवदंतियों का शहर

प्रम्बानन मंदिर के साथ एक प्रसिद्ध लोककथा ‘रोरो जोंगरांग’ (Roro Jonggrang) की कहानी भी जुड़ी है। किंवदंतियों के अनुसार, एक राजकुमार ने राजकुमारी का हाथ पाने के लिए एक रात में 1,000 मंदिर बनाने की चुनौती स्वीकार की थी। आज भी स्थानीय लोग इसे गर्व के साथ साझा करते हैं।

आज, प्रम्बानन मंदिर हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है, जो न केवल इसके इतिहास को जानने आते हैं, बल्कि उस गौरवशाली युग का अनुभव करने आते हैं जब हिंदू संस्कृति का प्रसार दूर-दूर तक फैला हुआ था।

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