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PAPER LEAK संशोधन विधेयक: चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर पूरा होगा ट्रायल, विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव  

पेपर लीक और परीक्षा धांधली पर कसेगा कड़ा शिकंजा, जांच के लिए भी 2 महीने की समय-सीमा तय; दोषियों को मिलेगी 10 साल तक की जेल

25 जुलाई, नई दिल्ली: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने और पेपर लीक जैसी धांधलियों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंजूरी मिलने के बाद संसद में पेश किए जाने वाले सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 (Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026) में अपराधियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए बड़े बदलावों का प्रस्ताव किया गया है।  

इस नए संशोधन विधेयक के तहत सबसे बड़ा प्रावधान यह है कि पेपर लीक और परीक्षा में धांधली से जुड़े मामलों में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल होने के 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा करना अनिवार्य होगा


शेष फास्ट ट्रैक अदालतों का होगा गठन

मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए इस विधेयक में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों (Special Fast Track Courts) के गठन का प्रस्ताव दिया गया है।  

  • ये अदालतें निरंतर (day-to-day) आधार पर दैनिक सुनवाई करेंगी।  

  • परीक्षा कानून के तहत लंबित पुराने सभी मामलों को भी इन विशेष अदालतों में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।  

  • इसके अलावा, फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसलों या जमानत आदेशों के खिलाफ अपील सीधे हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच (दो जजों की पीठ) में जाएगी, जहां 3 महीने के भीतर अपील का निपटारा किया जाना तय किया गया है।  

2 महीने में पूरी करनी होगी जांच

समयबद्ध न्याय देने के उद्देश्य से जांच एजेंसियों के लिए भी समय सीमा तय की गई है। पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसी या किसी विशेष टास्क फोर्स (STF) को मामले की जांच अधिकतम 2 महीने के भीतर पूरी करनी होगी  


कड़े दंड और भारी जुर्माने का प्रावधान

वर्ष 2024 के मूल कानून को और अधिक दंडात्मक और सख्त बनाने के लिए सजा और जुर्माने की राशि में भारी बढ़ोतरी प्रस्तावित की गई है:  

  • संगठित अपराध (Organized Crime): पेपर लीक कराने वाले संगठित गिरोहों और सिंडिकेट के लिए न्यूनतम सजा को 5 साल से बढ़ाकर कम से कम 7 साल से लेकर 10 साल तक की जेल करने का प्रस्ताव है। साथ ही जुर्माने को न्यूनतम 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक कर दिया गया है।  

  • सर्विस प्रोवाइडर पर नकेल: परीक्षा आयोजित कराने वाले सर्विस प्रोवाइडर (एजेंसियों) पर जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है, साथ ही उन पर बैन लगाने की अवधि को भी दोगुना किया जा सकता है।  

  • सामान्य अपराध: व्यक्तिगत स्तर पर गड़बड़ी में शामिल दोषियों के लिए न्यूनतम जेल की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 5 साल (अधिकतम 10 साल) और जुर्माना 50 लाख रुपये तक करने की सिफारिश है।  


पृष्ठभूमि नीट (NEET) जैसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के बाद देश भर में मचे बवाल और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को भरोसा दिलाया था कि सरकार दोषियों के खिलाफ बेहद कड़ा कानून लाएगी। कैबिनेट की तत्काल मंजूरी के बाद यह विधेयक सोमवार को संसद के मानसून सत्र में पेश होने के लिए पूरी तरह तैयार है।  

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