कार सफर होगा और सुरक्षित: सरकार लाई नए कड़े सुरक्षा मानक, जानें कब से होंगे लागू
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने कारों और वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नए और संशोधित मानक प्रस्तावित किए हैं, जो क्रैश टेस्ट, पैदल यात्रियों की सुरक्षा और वाहन कलपुर्जों से जुड़े हैं

22 अक्तूबर 2026, नई दिल्ली: भारतीय सड़कों पर दौड़ने वाली गाड़ियां अब और अधिक सुरक्षित होने जा रही हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा कारों और वाहनों की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए नए और संशोधित सुरक्षा मानक प्रस्तावित किए गए हैं। सरकार का यह कदम देश में सड़क हादसों के दौरान यात्रियों और पैदल चलने वालों की जान बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
आइए जानते हैं इन नए सुरक्षा नियमों से जुड़ी मुख्य बातें, जो अलग-अलग चरणों में लागू होंगी:
प्रमुख सुरक्षा बदलाव और मानक:
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फ्रंटल और साइड क्रैश सुरक्षा: गाड़ियों में आगे और बगल (साइड) से होने वाले हादसों (Crash) के दौरान यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए नए और कड़े मानक तय किए गए हैं।
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पैदल चलने वालों (Pedestrians) की सुरक्षा: गाड़ियों के डिजाइन में अब पैदल चलने वालों की सुरक्षा पर भी विशेष फोकस किया जाएगा। नए मॉडल्स के लिए 1 अक्टूबर 2028 से संशोधित मानक और 1 अक्टूबर 2032 से FlexPLI टेस्ट उपकरण का इस्तेमाल अनिवार्य किया जाना प्रस्तावित है।
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फ्यूल सिस्टम और इलेक्ट्रिक पावरट्रेन की सुरक्षा: यदि वाहन को पीछे से टक्कर लगती है, तो ऐसी स्थिति में फ्यूल सिस्टम और इलेक्ट्रिक वाहनों के पावरट्रेन की सुरक्षा से जुड़े मानकों को भी अपडेट किया जाएगा।
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EDR (इवेंट डेटा रिकॉर्डर) की अनिवार्यता: गाड़ियों में हादसों से जुड़ा डेटा रिकॉर्ड करने वाले डिवाइस (EDR) के मानक भी लागू किए जाएंगे, जिससे दुर्घटना के कारणों का सटीक विश्लेषण किया जा सकेगा।
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इमोबिलाइज़र (Immobilizer): वाहन चोरी रोकने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए M1 श्रेणी की गाड़ियों में इमोबिलाइज़र की अनिवार्य फिटिंग की समयसीमा 1 अक्टूबर 2027 तय की गई है।
सरकार के इन संशोधनों से स्पष्ट है कि आने वाले समय में भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में लॉन्च होने वाली नई कारें ग्लोबल सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के और अधिक करीब होंगी।




