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दिल्ली में बच्चा तस्करी रैकेट का भंडाफोड़: 20 दिन के मासूम को 8 लाख में खरीदने वाले ससुर-बहू गिरफ्तार

रोहिणी के एक घर से नवजात बच्चा सुरक्षित रेस्क्यू; अस्पताल की आड़ में 30 से अधिक शिशुओं का सौदा कर चुका है यह अंतरराज्यीय गिरोह

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने मानव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए रोहिणी इलाके से 20 दिन के एक नवजात बच्चे को सुरक्षित रेस्क्यू किया है। इस मामले में पुलिस ने एक बिजनेसमैन और उसकी बहू को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने इस बच्चे को ₹8 लाख में खरीदा था। पुलिस के मुताबिक, यह गिरफ्तारियां हाल ही में पकड़े गए एक बड़े अंतरराज्यीय बच्चा तस्करी सिंडिकेट से जुड़ी हैं, जिसने पिछले दो सालों में करीब 30 नवजात शिशुओं का सौदा किया है।

रोहिणी के घर से बच्चा बरामद, आरोपी ससुर और बहू गिरफ्तार

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गुप्त सूचना और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) के आधार पर सोमवार को रोहिणी के सेक्टर-3 स्थित एक घर में छापेमारी की गई। वहां से 20 दिन के मासूम को बरामद किया गया। पुलिस ने मौके से गरिमा जैन और उनके ससुर सतीश जैन को गिरफ्तार कर लिया है। सतीश जैन की रोहिणी में स्टील के उपकरण बनाने वाली एक फैक्ट्री है। वहीं, गरिमा का पति फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। रेस्क्यू किए गए बच्चे को फिलहाल चाइल्ड केयर होम भेज दिया गया है।

अस्पताल की आड़ में चल रहा था रैकेट

जांच में सामने आया है कि इस पूरे काले कारोबार का केंद्र रोहिणी के बेगमपुर स्थित ‘हीरा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल’ (Hira’s Multi Speciality Hospital) था। इस मामले में पुलिस अस्पताल के मालिक डॉक्टर विवेकी (47 वर्ष), फ्रीलांस लैब टेक्नीशियन प्रतिभा (34 वर्ष) और इस पूरे गिरोह के मास्टरमाइंड सायबाभाई गामर उर्फ कालिया (25 वर्ष) को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। कालिया मूल रूप से राजस्थान के उदयपुर का रहने वाला है और गुजरात में रह रहा था।

पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने अब तक कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें अस्पताल संचालक, बिचौलिए, ट्रांसपोर्टर और खरीदार शामिल हैं।

ऐसे होता था नवजातों का सौदा

पूछताछ और जांच के दौरान इस सिंडिकेट के काम करने के तरीके (Modus Operandi) का सनसनीखेज खुलासा हुआ है:

  • गरीब परिवारों को निशाना: यह गिरोह राजस्थान और गुजरात के आर्थिक रूप से बेहद कमजोर और गरीब परिवारों को निशाना बनाता था।

  • सस्ते में खरीद: गिरोह के सदस्य इन गरीब माता-पिता को ₹1.5 लाख से ₹2 लाख देकर उनके नवजात बच्चों को खरीद लेते थे।

  • फर्जी दस्तावेज: बच्चों को दिल्ली लाकर डॉक्टर विवेकी के अस्पताल में रखा जाता था, जहां उनके फर्जी मेडिकल और जन्म प्रमाण पत्र तैयार किए जाते थे ताकि यह दिखाया जा सके कि बच्चे का जन्म इसी अस्पताल में हुआ है।

  • लाखों में बिक्री: इसके बाद दिल्ली-NCR, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के निसंतान दंपतियों को ये बच्चे ₹6 लाख से ₹9 लाख रुपये में बेच दिए जाते थे।

पुलिस की कार्रवाई जारी

स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस (लॉ एंड ऑर्डर) देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि यह ऑपरेशन पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय से चल रहा है। पुलिस अस्पताल के रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस सिंडिकेट ने और कितने बच्चों को बेचा है। पुलिस अब रेस्क्यू किए गए मासूम के जैविक (biological) माता-पिता की तलाश करने में जुटी है। इस मामले में आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां और अन्य बच्चों के रेस्क्यू होने की उम्मीद है।

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