गाजियाबाद बलात्कार-हत्या मामला: इलाज से इनकार करने वाले निजी अस्पतालों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, डॉक्टरों को लगाई फटकार
शीर्ष अदालत ने कहा—"अगर फर्ज नहीं निभा सकते, तो डॉक्टर कहलाने का हक नहीं"; पीड़ित परिवार को मुआवजा देने का निर्देश

नई दिल्ली | 17 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मार्च 2026 में हुई 4 साल की बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने उन दो निजी अस्पतालों को फटकार लगाई है, जिन्होंने गंभीर रूप से घायल बच्ची को इलाज देने से इनकार कर दिया था।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि
घटना मार्च 2026 की है, जब 4 साल की मासूम बच्ची को उसके पड़ोसी ने चॉकलेट दिलाने के बहाने बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया था। बाद में बच्ची बेहोश और खून से लथपथ हालत में मिली। परिवार उसे मदद के लिए पास के दो निजी अस्पतालों—खजान सिंह मानवी हेल्थ केयर और सेंट जोसेफ (मरियम) हॉस्पिटल—ले गया, लेकिन आरोप है कि दोनों अस्पतालों ने उसे भर्ती करने से ही मना कर दिया। अंततः, एक सरकारी अस्पताल ले जाते समय बच्ची ने दम तोड़ दिया।

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाला बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान अस्पतालों की संवेदनहीनता पर गहरी नाराजगी जाहिर की। CJI ने सीधे तौर पर डॉक्टरों से कहा:
“आपको ‘डॉक्टर’ लिखने का कोई हक नहीं है, अगर आप अपना फर्ज नहीं निभा सकते। अगर आपके पास सुविधाएं नहीं थीं, तो क्या आपकी जिम्मेदारी नहीं थी कि आप उस बच्ची को साथ लेकर दूसरे अस्पताल जाते? क्या आपने उसे सिर्फ इसलिए नजरअंदाज किया क्योंकि वह गरीब थी और आपकी फीस देने में असमर्थ थी?”
कोर्ट के निर्देश और अब तक की कार्रवाई
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मुआवजे के आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने दोनों निजी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दें।
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पुलिस की कार्यशैली पर सवाल: कोर्ट ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति जताई कि गाजियाबाद पुलिस ने शुरुआत में एफआईआर (FIR) दर्ज करने में कितनी “अनिच्छा” दिखाई थी। अप्रैल में हुई सुनवाई के दौरान भी कोर्ट ने पुलिस के “संवेदनहीन रवैये” को लेकर फटकार लगाई थी।
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गोपनीयता और सुरक्षा: कोर्ट ने राज्य पुलिस को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि मामले की जांच के दौरान पीड़ित परिवार की पहचान उजागर न हो और उन्हें किसी भी तरह से परेशान न किया जाए।
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अगली सुनवाई: इस मामले की अगली सुनवाई अगले हफ्ते होगी, जिसमें कोर्ट पूरे मामले की निगरानी जारी रखेगा।
पीड़ित परिवार ने इस मामले में कोर्ट की निगरानी में जांच (SIT या CBI द्वारा) की मांग की है। यह घटना चिकित्सा जगत की नैतिकता और संवेदनशीलता पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।




