वैगई बांध में 68 साल का सबसे बड़ा जल संकट: 5 जिलों के किसानों पर मंडराया सूखा
कम बारिश और मानसून में देरी से सिर्फ 27 फीट बचा पानी; पहली फसल अटकी, पीने के पानी की भी किल्लत शुरू

मदुरै: तमिलनाडु के कृषि क्षेत्र से इस वक्त एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। पांच जिलों के लाखों किसानों और आम जनता की लाइफलाइन माना जाने वाला वैगई बांध (Vaigai Dam) इस समय अपने इतिहास के सबसे भीषण जल संकट से गुजर रहा है। कम बारिश और मानसून में देरी के कारण बांध का जलस्तर घटकर सिर्फ 27 फीट रह गया है, जो पिछले 68 वर्षों में इसका सबसे निचला स्तर है।
71 फीट की कुल क्षमता वाले इस विशाल बांध का इस तरह खाली होना केवल एक मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि पूरे इलाके के लिए एक बड़े आर्थिक और कृषि संकट का अलार्म है।

जून में नहीं छूटा पानी, अधर में लटकी पहली फसल (First Crop Season)
आमतौर पर हर साल जून के महीने में वैगई बांध से पहली फसल सीजन के लिए पानी छोड़ दिया जाता था, जिससे मदुरै और आसपास के जिलों में धान और अन्य फसलों की बुवाई शुरू हो जाती थी। लेकिन इस साल स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है:
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जुलाई तक खिंचा इंतजार: घटते जलस्तर के कारण प्रशासन अब जून में पानी रिलीज करने की स्थिति में नहीं है। अब उम्मीद जुलाई पर टिकी है, बशर्ते अच्छी बारिश हो।
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बदल रहा है खेती का चक्र: पिछले कुछ सालों से गिरती बारिश के कारण पानी छोड़ने का समय जून से खिसककर जुलाई हो रहा है, जिससे फसलों का पूरा चक्र (Crop Cycle) प्रभावित हो रहा है।

5 जिलों के किसानों की बढ़ी धड़कनें
वैगई बांध का पानी तमिलनाडु के पांच प्रमुख जिलों—मदुरै, थेनी, डिंडीगुल, शिवगंगा और रामनाथपुरम के लिए रीढ़ की हड्डी है।
“अगर बांध में पानी का स्तर इसी तरह गिरता रहा, तो न केवल हमारी पहली फसल बर्बाद होगी, बल्कि आने वाले दिनों में मवेशियों के चारे और पीने के पानी का भी गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।”
— मदुरै के स्थानीय किसान
किसान अब असमंजस में हैं कि वे धान की नर्सरी तैयार करें या मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने का इंतजार करें। देरी से बुवाई करने पर फसल के चक्रवात या बेमौसम सर्दियों की बारिश की चपेट में आने का खतरा भी बढ़ जाता है।
तमिलनाडु के 5 जिलों के किसानों के सामने खेती और पानी का बड़ा संकट!
📉 आंकड़ों में समझिए संकट की भयावहता
| मानक (Parameter) | विवरण (Details) |
| कुल क्षमता (Full Height) | 71 फीट |
| वर्तमान जलस्तर (Current Level) | 27 फीट |
| ऐतिहासिक संदर्भ (History) | पिछले 68 वर्षों में सबसे कम स्तर |
| प्रभावित क्षेत्र (Impact Area) | 5 प्रमुख जिले (मदुरै, थेनी, डिंडीगुल, शिवगंगा, रामनाथपुरम) |
खेती के साथ पीने के पानी पर भी मंडराया खतरा
वैगई बांध सिर्फ खेतों की प्यास नहीं बुझाता, बल्कि मदुरै कॉर्पोरेशन और इसके आसपास के दर्जनों कस्बों के लिए पेयजल का मुख्य स्रोत भी है। यदि अगले कुछ दिनों में पश्चिमी घाट के जलग्रहण क्षेत्रों (Catchment Areas) में भारी बारिश नहीं होती है, तो प्रशासन को सिंचाई से पहले पीने के पानी को प्राथमिकता देनी होगी। ऐसे में किसानों के लिए संकट और गहरा सकता है।

आगे क्या?
फिलहाल स्थानीय मौसम विभाग और किसान दोनों की नजरें आसमान पर टिकी हैं। विशेषज्ञ अब जल संरक्षण की आधुनिक तकनीकों और बांधों की गाद निकालने (Dredging) जैसे दीर्घकालिक उपायों पर जोर दे रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के सूखे से निपटा जा सके।




