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गंगा एक्सप्रेसवे: पहली ही बारिश में धंसी लिंक रोड, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

उद्घाटन के दो महीने बाद ही सामने आई बड़ी लापरवाही; उन्नाव में बारिश के पानी से धंसी सड़क, स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश

7 जुलाई, उन्नाव: उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के महज दो महीने बाद ही उसकी निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मानसून की पहली ही बारिश ने एक्सप्रेसवे को कानपुर-लखनऊ नेशनल हाईवे से जोड़ने वाली लिंक रोड की पोल खोल दी है।

क्या है पूरा मामला?

उन्नाव जिले के सोनिक क्षेत्र में स्थित बशीरगंज के पास, गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाली लिंक रोड का लगभग सात मीटर का हिस्सा भारी बारिश के बाद धंस गया। बारिश के पानी के कारण सड़क के नीचे की मिट्टी पूरी तरह से बह गई, जिससे सड़क का एक बड़ा हिस्सा गड्ढे में तब्दील हो गया।

स्थानीय निवासियों के गंभीर आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान ही उन्होंने सड़क की स्थिरता और गुणवत्ता को लेकर अपनी चिंताएं जताई थीं, लेकिन उस समय अधिकारियों ने इन चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया। निवासियों का आरोप है कि सड़क निर्माण में मानकों के अनुसार ‘स्लोप प्रोटेक्शन’ (ढलान की सुरक्षा) और ‘सॉइल-रिटेंशन’ (मिट्टी को रोकने के उपाय) जैसी बुनियादी इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।

कवरेज के दौरान पत्रकारों को रोकने का प्रयास

इस घटना की सूचना मिलने पर जब मीडियाकर्मी कवरेज करने और क्षतिग्रस्त हिस्से की तस्वीरें लेने पहुंचे, तो वहां मौजूद निर्माण एजेंसी के कर्मचारियों और इंजीनियरों ने उन्हें ऐसा करने से रोकने का प्रयास किया। कर्मचारियों ने यह कहकर फोटोग्राफी पर आपत्ति जताई कि एक्सप्रेसवे पर तस्वीरें खींचना वर्जित है।

प्रशासन और UPEIDA की प्रतिक्रिया

सदर उप-जिलाधिकारी (SDM) क्षितिज द्विवेदी ने बताया कि यह पूरा प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के अधिकार क्षेत्र में आता है। किसी भी प्रकार की जांच या आगे की कार्रवाई का निर्णय उन्हीं के स्तर से लिया जाएगा।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 29 अप्रैल को उद्घाटन किए जाने से पहले भी, एक्सप्रेसवे के सर्विस लेन और मुख्य मार्ग के कई हिस्सों में मिट्टी धंसने और रेलिंग टूटने जैसी समस्याएं सामने आई थीं। हालांकि, अब तक UPEIDA की ओर से इस ताजा घटना पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन मानसून के शुरुआती दिनों में ही हुई इस क्षति ने पूरे प्रोजेक्ट की मजबूती पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।


स्रोत: विभिन्न समाचार एजेंसियां

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