नीट विवाद के बीच चर्चा में आया धर्मेंद्र प्रधान का 30 साल पुराना आंदोलन; पेपर लीक के खिलाफ जब लहूलुहान हुए थे वर्तमान शिक्षा मंत्री
1997 ओडिशा प्रश्न पत्र लीक मामला: जब एबीवीपी नेता के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने झेला था पुलिस का बर्बर लाठीचार्ज

22 जुलाई, भुवनेश्वर: देश में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को लेकर जारी विवाद और पेपर लीक के आरोपों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान लगातार विपक्ष और छात्रों के निशाने पर हैं। लेकिन इस बड़े संकट के बीच, सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में धर्मेंद्र प्रधान का लगभग तीन दशक पुराना एक छात्र आंदोलन तेजी से चर्चा में आ गया है। दिलचस्प बात यह है कि आज जिस पेपर लीक विवाद को सुलझाने की चुनौती धर्मेंद्र प्रधान के सामने है, करीब 30 साल पहले उन्होंने खुद ऐसे ही एक पेपर लीक के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन छेड़ा था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल भी हुए थे।

क्या हुआ था 1997 के उस आंदोलन में?
यह बात साल 1997 की है, जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार संसद में अपना बहुमत साबित करने की कोशिशों में जुटी थी। उसी दौरान ओडिशा में एक बड़ा प्रश्न पत्र लीक (Paper Leak) का मामला सामने आया।
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छात्र नेता के रूप में नेतृत्व: उस समय धर्मेंद्र प्रधान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के राष्ट्रीय सचिव थे और भाजपा में शामिल होने की दहलीज पर थे। उन्होंने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तत्कालीन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की राज्य सरकार के खिलाफ एक विशाल प्रदर्शन का नेतृत्व किया।
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1500 छात्रों का प्रदर्शन: ओडिशा सचिवालय के सामने धर्मेंद्र प्रधान के आह्वान पर लगभग 1,500 छात्र शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हुए थे।
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पुलिस की बर्बरता और फ्रैक्चर: आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस ने छात्रों पर बेरहमी से लाठीचार्ज कर दिया। इस लाठीचार्ज में युवा छात्र नेता धर्मेंद्र प्रधान गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस की लाठियों से उनके शरीर की कई हड्डियां टूट गईं और उन्हें गंभीर फ्रैक्चर आए।
इस हिंसक लाठीचार्ज और चोटों के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान पीछे नहीं हटे और उन्होंने अपनी लड़ाई जारी रखी। इस घटना ने उन्हें ओडिशा में एक बेहद मजबूत और प्रमुख छात्र नेता के रूप में स्थापित कर दिया, जिसने आगे चलकर उनके राजनीतिक भविष्य की नींव रखी।

आज क्यों उठ रहे हैं सवाल?
इंटरनेट और सोशल मीडिया पर धर्मेंद्र प्रधान के इस पुराने संघर्ष की तस्वीरें और कहानियां साझा की जा रही हैं। जहां एक तरफ लोग उनके इस साहसी अतीत और छात्र हितों के लिए लाठियां खाने की प्रशंसा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आलोचक और प्रदर्शनकारी छात्र उनसे तीखे सवाल भी पूछ रहे हैं।
जनता का सवाल: सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि जो नेता कभी खुद पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर उतरा था और पुलिस की लाठियां खाई थीं, आज वही देश का केंद्रीय शिक्षा मंत्री है। ऐसे में यह बेहद निराशाजनक है कि उनके कार्यकाल में नीट (NEET) जैसी बड़ी परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं और वे इसे रोकने में पूरी तरह प्रभावी साबित नहीं हो पा रहे हैं।
लगभग 30 साल पहले ओडिशा की सड़कों से शुरू हुआ धर्मेंद्र प्रधान का यह सफर आज देश के सबसे बड़े परीक्षा संकट (NEET Controversy) के केंद्र में आकर खड़ा हो गया है। अब देखना यह है कि क्या युवा दिनों में पेपर लीक के खिलाफ लड़ने वाले धर्मेंद्र प्रधान, आज शिक्षा मंत्री के रूप में लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के भविष्य को सुरक्षित और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली दे पाते हैं या नहीं।



