2011 का विनाशकारी जापानी भूकंप: धरती की गहराई तक पहुंची लहरों ने कैसे खिसकाया पूरा देश?
भूकंप के 15 साल बाद वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा: पृथ्वी के कोर से टकराकर वापस आई ऊर्जा ने जापान को 6 मिलीमीटर तक खिसका दिया था।

नई दिल्ली: 11 मार्च 2011 को जापान में आए 9.0 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप और उसके बाद आई सुनामी को आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी आपदाओं में गिना जाता है। लेकिन इस घटना के इतने वर्षों बाद वैज्ञानिकों ने एक ऐसी चौंकाने वाली सच्चाई का पता लगाया है, जिसने भूकंप विज्ञान के प्रति हमारी समझ को बदल दिया है।
क्या था वह रहस्यमयी बदलाव?
हालिया शोध से पता चला है कि उस भीषण भूकंप के दौरान धरती के अंदर से एक ऐसी ऊर्जा लहर निकली, जो सीधे पृथ्वी के केंद्र (कोर) तक गई और वहां से टकराकर वापस सतह पर आई। इस प्रक्रिया ने न केवल जापान को भौगोलिक रूप से प्रभावित किया, बल्कि एक नए प्रकार के ‘आफ्टरशॉक’ खतरे को भी जन्म दिया।
यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के भूभौतिकीविद् सनयंग पार्क के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन के अनुसार, इस घटना ने पूरे जापान को 6 मिलीमीटर (लगभग दो सिक्कों की मोटाई के बराबर) पूर्व दिशा की ओर खिसका दिया था।

‘ScS’ लहर का सफर
वैज्ञानिकों ने इस घटना के लिए ‘ScS वेव’ को जिम्मेदार माना है। यह एक प्रकार की ‘शियर वेव’ है जो पृथ्वी के मेंटल से होते हुए निकलती है और जब यह तरल बाहरी कोर (outer core) से टकराकर वापस लौटती है, तो सतह पर भारी हलचल पैदा करती है।
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दूरी: इस लहर ने पृथ्वी के भीतर लगभग 3,600 मील की दूरी तय की।
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समय: यह पूरी प्रक्रिया लगभग 15 मिनट में पूरी हुई।
यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है?
यह अब तक की सबसे व्यापक भूकंपीय घटना मानी जा रही है, जो लगभग 1,800 मील के क्षेत्र में फैली हुई थी। इस घटना ने एक साथ दो प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों—प्रशांत (Pacific) और ओखोटस्क (Okhotsk), तथा फिलीपीन सागर (Philippine Sea) और यूरेशियन प्लेटों को प्रभावित किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि मुख्य भूकंप ने इन प्लेटों की सीमाओं को कमजोर कर दिया था, जिससे गहराई से आई लहरों ने उन्हें आसानी से और सक्रिय कर दिया। यह पहली बार है जब वैज्ञानिकों ने यह समझा है कि कैसे किसी बड़े भूकंप की ऊर्जा पृथ्वी की गहराई में जाकर, मुख्य कंपन खत्म होने के बाद भी लंबी अवधि तक खतरे का कारण बन सकती है।
भविष्य के लिए चेतावनी
यह शोध ‘साइंस’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है, जो चेतावनी देता है कि बड़े भूकंपों का प्रभाव सतह तक ही सीमित नहीं रहता। यह धरती के भीतर से वापस टकराकर आने वाली ऊर्जा के माध्यम से नए क्षेत्रों में भी हलचल पैदा कर सकता है। जापान जैसे देशों के लिए, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटें मिलती हैं, यह नई जानकारी भविष्य में बेहतर आपदा प्रबंधन और निगरानी के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है।




