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अयोध्या राम मंदिर घोटाला: बेहिसाब चढ़ावे में करोड़ों का गबन, सवालों के घेरे में श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी

दान के सोने-चांदी समेत 2 किलो की सोने की गदा गायब होने की चर्चा; SIT की जांच के बीच सुरक्षा और आउटसोर्सिंग प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे में बड़े पैमाने पर गबन और हेरफेर का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस कथित घोटाले को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

200 करोड़ रुपये तक के घपले की आशंका

शुरुआती जांच और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले गबन की गई राशि करीब 8 करोड़ रुपये आंकी जा रही थी। हालांकि, सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में यह आंकड़ा 100 से 200 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अंदेशा जताया जा रहा है।

रकम के अलावा, मंदिर को अर्पित किए गए बहुमूल्य जेवरात भी गायब होने की बात सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार, करोड़ों रुपये के सोने-चांदी के आभूषणों के साथ-साथ 2 किलो वजनी सोने की गदा के भी गायब होने की चर्चा है। हालांकि, अभी तक इस पर ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।


कैसे हुआ यह खेल? (लापरवाही और मिलीभगत)

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, चढ़ावे की राशि में हेरफेर करने के लिए सुरक्षा और प्रबंधन की कई गंभीर खामियों का फायदा उठाया गया:

  • बेहिसाब गिनती: चढ़ावे की राशि को गिनने से पहले उसका कोई पुख्ता रिकॉर्ड नहीं था। गिनती के दौरान ही बड़ी रकम चुपके से पार कर दी जाती थी।

  • आउटसोर्सिंग का खेल: बैंक ने पैसे गिनने और प्रबंधन के लिए एक निजी कंपनी को आउटसोर्सिंग का ठेका दिया था। आरोप है कि इस कंपनी में रखे गए कर्मचारी सीधे तौर पर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के परिचित या रिश्तेदार थे।

  • जांच और सुरक्षा में ढिलाई: ट्रस्ट के कर्मचारी होने के नाते इन कर्मियों की न तो कोई गहन जांच (जामा तलाशी) की जाती थी और न ही उनके क्रेडेंशियल्स का पुलिस वेरिफिकेशन हुआ था। बैंक अधिकारियों ने भी ट्रस्ट के रसूख के आगे इस व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाए।


सवालों के घेरे में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट

इस पूरे मामले में विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया गया है, जो अब तक पांच संदिग्धों को पकड़कर करीब 3 करोड़ रुपये बरामद कर चुकी है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों पर उठ रहा है:

  • चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव जैसे बड़े पदाधिकारियों पर सीधे तौर पर लापरवाही और निगरानी न रखने के आरोप लग रहे हैं।

  • घटना के उजागर होने के बाद से ही ट्रस्ट के किसी भी बड़े पदाधिकारी ने इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, जिससे उनकी खामोशी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

  • रसूखदार और पावरफुल अधिकारियों की मौजूदगी के बीच क्या SIT पूरी निष्पक्षता से जांच कर पाएगी, इसे लेकर भी संशय बना हुआ है।


राजनीतिक बयानबाजी और विरोध

करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले पर विपक्षी दलों और सहयोगियों ने कड़ी कार्रवाई की मांग की है:

“राम मंदिर के दानपात्र में चोरी और जमीन खरीद में बड़े घोटाले किए गए हैं। 2.92 करोड़ की नजूल जमीन को 24 करोड़ रुपये में खरीदा गया। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, दोषियों की गिरफ्तारी हो और ट्रस्ट को तुरंत भंग किया जाए।” — संजय सिंह, सांसद (आप)

“श्रीराम जन्मभूमि के चढ़ावे में चोरी अक्षम्य है। मंदिर से करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं। राज्य सरकार ने SIT का गठन किया है और हम मांग करते हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।” — अनुप्रिया पटेल, केंद्रीय मंत्री व अपना दल अध्यक्ष


फिलहाल इस मामले में SIT की जांच जारी है। बरामदगी और संदिग्धों से पूछताछ के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि आस्था के इस केंद्र में असल में कितने करोड़ का गबन हुआ है और इसके पीछे मुख्य सूत्रधार कौन है।

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