भारत को मिली पहली डेंगू वैक्सीन, DCGI ने जापानी कंपनी की ‘QDENGA’ को दी मंजूरी
4 से 60 वर्ष के लोगों को दी जाएगी वैक्सीन; पहले डेंगू होने की जांच कराना भी जरूरी नहीं

नई दिल्ली, 21 जुलाई 2026: देश में डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच भारत को इस जानलेवा बीमारी के खिलाफ पहली वैक्सीन मिल गई है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने जापानी दवा निर्माता कंपनी टाकेडा बायोफार्मास्युटिकल्स (Takeda Biopharmaceuticals) की डेंगू वैक्सीन ‘QDENGA’ को बाजार में उतारने की मंजूरी दे दी है। यह कदम भारत में डेंगू की रोकथाम के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
वैक्सीन से जुड़ी मुख्य बातें:
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उम्र सीमा: यह वैक्सीन 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों के लिए स्वीकृत की गई है।
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प्री-वैक्सीनेशन स्क्रीनिंग की जरूरत नहीं: इस वैक्सीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लगवाने से पहले यह जांचने की जरूरत नहीं है कि व्यक्ति को पहले डेंगू हुआ था या नहीं।
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खुराक (Dose): यह वैक्सीन 0.5 मिलीलीटर के दो इंजेक्शन के रूप में दी जाएगी, जिन्हें त्वचा के नीचे (Subcutaneous) 3 महीने के अंतराल पर लगाया जाएगा।
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सभी 4 सीरोटाइप पर प्रभावी: कंपनी के अनुसार, यह वैक्सीन डेंगू के सभी चार वायरस सीरोटाइप (DEN-1, DEN-2, DEN-3 और DEN-4) के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है।
वैश्विक और भारतीय परीक्षणों में मिली सफलता
कंपनी द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस वैक्सीन का मूल्यांकन 28,000 से अधिक प्रतिभागियों पर 19 फेज-I, II और III क्लिनिकल ट्रायल्स के तहत किया गया है। भारत में भी फेज-III (DEN-302) क्लिनिकल ट्रायल आयोजित किए गए थे, जिसमें 4 से 60 वर्ष के भारतीयों में इसके सुरक्षित होने और मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune Response) विकसित करने की पुष्टि हुई है। 7 साल के दीर्घकालिक डेटा से पता चलता है कि यह वैक्सीन डेंगू संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को काफी हद तक कम करती है।
भारत के लिए क्यों है बेहद जरूरी?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, वैश्विक स्तर पर डेंगू के कुल मामलों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा भारत में है। तेजी से होते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और मच्छरों के पनपने के अनुकूल परिस्थितियों के कारण भारत में डेंगू का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
टाकेडा के इंटरकॉन्टिनेंटल मार्केट्स के प्रमुख महेंद्र नायक ने बताया कि साल 2022 में लॉन्च होने के बाद से QDENGA को अब तक 43 देशों में मंजूरी मिल चुकी है और दुनिया भर में इसकी 3.2 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं। डब्ल्यूएचओ ने भी इसे डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रमों में शामिल करने की सिफारिश की है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस वैक्सीन के आने से देश में स्वास्थ्य प्रणाली पर डेंगू के कारण पड़ने वाला बोझ काफी कम होगा, हालांकि इसके साथ ही मच्छरों पर नियंत्रण और सार्वजनिक जागरूकता जैसे उपाय भी जारी रखने होंगे।




