Video: कांवड़ यात्रा के बाद बदहाल हुआ हरिद्वार: हर की पैड़ी पर पेशाब से भरी बोतलें और 7,000 टन कचरा

12 अगस्त, हरिद्वार: सावन महीने में कांवड़ यात्रा का समापन हो चुका है, लेकिन इसके बाद देवभूमि उत्तराखंड का हरिद्वार शहर कूड़े-कचरे के बड़े संकट से जूझ रहा है। इस वर्ष सावन के दौरान लगभग पांच करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा जल लेने के लिए हरिद्वार की यात्रा की। शिवरात्रि के बाद जब श्रद्धालु अपने गंतव्य की ओर लौटे, तो पीछे घाटों और सड़कों पर कचरे का बड़ा अंबार छोड़ गए।
हरिद्वार के प्रसिद्ध घाट हर की पैड़ी समेत अन्य घाटों पर कपड़े, प्लास्टिक की वस्तुएं और कांवड़ के ढांचे बिखरे पड़े हैं। सबसे अधिक चौंकाने वाली स्थिति चेंजिंग रूम्स (कपड़े बदलने के कक्षों) में देखने को मिली, जहाँ पेशाब से भरी प्लास्टिक की बोतलें पाई गईं। सोशल मीडिया पर आए वीडियो में सफाई कर्मचारी बिना मास्क और ग्लव्स के फावड़े की मदद से इन बोतलों को हटाते हुए नज़र आए।
स्थानीय निवासियों में भारी रोष
घाटों पर फैली इस गंदगी को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस गंगा जल को लेने श्रद्धालु सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर आते हैं, उसी पवित्र स्थल पर इस तरह गंदगी छोड़ दी जाती है।
नगर निगम आयुक्त नंदन कुमार ने बताया, “शिवरात्रि के बाद हमारी सभी टीमों ने रात भर अभियान चलाकर घाटों, पार्किंग स्थलों और मुख्य सड़कों से कचरा हटाने का काम किया है।” प्रशासन के मुताबिक, अब तक हरिद्वार के डंपिंग ग्राउंड्स में 7,000 टन से अधिक कचरा पहुँचाया जा चुका है, जिससे कचरे के ऊँचे पहाड़ बन गए हैं।
गंगोत्री धाम पर भी पर्यावरण का संकट
केवल हरिद्वार ही नहीं, बल्कि गंगा के उद्गम स्थल गंगोत्री तक पहुँचे श्रद्धालुओं के कारण भी पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचा है। इस बार सावन में लगभग 57,000 श्रद्धालुओं ने गंगोत्री धाम का दौरा किया।
गंगोत्री क्षेत्र को प्लास्टिक-मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया है, फिर भी यात्रा खत्म होने के बाद वहां से बड़े पैमाने पर प्लास्टिक और कपड़े बरामद हुए। यात्रा के समापन के बाद वन विभाग द्वारा चलाए गए विशेष सफाई अभियान के दौरान केवल गंगोत्री क्षेत्र से ही 57 बोरी कचरा एकत्र किया गया। हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के लिए प्लास्टिक का यह ढेर एक बड़ा खतरा माना जा रहा है।




