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Video: रेलवे का ‘विकास’: स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर छत से झर रहे पानी के बीच यात्री बेहाल

क्या रायपुर रेलवे स्टेशन पर अब 'रेनकोट' पहनकर आना होगा? यात्रियों ने प्रबंधन के दावों की खोली पोल

5 जुलाई, रायपुर: राजधानी रायपुर के मुख्य रेलवे स्टेशन पर अव्यवस्थाओं की तस्वीरें एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हल्की बारिश के बाद स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 की छत से पानी का रिसाव इस कदर हो रहा है कि प्लेटफॉर्म किसी झरने जैसा नजर आने लगा है। स्टेशन परिसर में पानी भरने और छत से टपकते पानी के कारण यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

प्लेटफॉर्म पर ही ‘स्नान’ को मजबूर यात्री

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में देखा जा सकता है कि प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर छत से लगातार पानी की धार गिर रही है। यात्रियों के लिए प्लेटफॉर्म पर चलना मुश्किल हो गया है। हालात इतने खराब हैं कि जो यात्री ट्रेन पकड़ने की जल्दी में प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं, उन्हें भी इस जलभराव और टपकते पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे वे पूरी तरह भीग रहे हैं।

सुरक्षा और रखरखाव पर उठे सवाल

शहर के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशन की यह स्थिति प्रशासन के दावों की पोल खोल रही है। यात्रियों का कहना है कि स्टेशन के रखरखाव और छत की मरम्मत को लेकर रेलवे प्रबंधन गंभीर नहीं है। मामूली बारिश में भी ऐसी स्थिति यह दर्शाती है कि स्टेशन पर की गई तैयारियां नाकाफी हैं।

  • यात्रियों की परेशानी: पानी के कारण प्लेटफॉर्म पर फिसलन बढ़ गई है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों के गिरने का डर बना हुआ है।

  • सामान बचाने की जद्दोजहद: यात्री अपने लगेज को पानी से बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की तलाश करते नजर आए।

  • प्रशासन की चुप्पी: इस मामले में अब तक रेलवे की ओर से कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है।

क्या कहता है प्रशासन?

हालांकि इस संबंध में रेलवे अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है, लेकिन आम जनता में इस बदहाली को लेकर भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि यदि विकसित भारत और आधुनिक सुविधाओं का दावा किया जा रहा है, तो कम से कम रेलवे स्टेशनों पर आधारभूत सुविधाएं तो दुरुस्त होनी ही चाहिए।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब रायपुर स्टेशन पर बारिश के दौरान इस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई हो, बावजूद इसके सुधार के ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

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