
14 जुलाई, मंडी, हिमाचल प्रदेश: पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए एक राहत भरी खबर है। मंडी-कुल्लू नेशनल हाईवे पर अक्सर सफर में बाधा बनने वाले सबसे खतरनाक और संवेदनशील पॉइंट, जिसे स्थानीय लोग “नौ मील” (Nau Mile) के नाम से जानते हैं, उसे अब पूरी तरह सुरक्षित बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। भूस्खलन की समस्या से निजात दिलाने के लिए यहाँ 39 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक 160 मीटर लंबी थ्री-लेयर (तीन-परतीय) सुरक्षा दीवार का निर्माण किया जाएगा।
सफर को सुरक्षित बनाने की चुनौती
हिमाचल प्रदेश का भूगोल और यहाँ का मौसम अत्यंत अनिश्चित रहता है। खासकर मानसून के दौरान (जुलाई से सितंबर तक), भारी बारिश और पहाड़ी ढलानों के कच्चा होने के कारण यहाँ अक्सर लैंडस्लाइड और अचानक बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। ‘नौ मील’ का इलाका इस खतरे के केंद्र में रहा है, जहाँ ऊपर से गिरते मलबे और पत्थरों के कारण हाईवे घंटों, और कभी-कभी दिनों तक बंद रहता है।
थ्री-लेयर सुरक्षा दीवार की खासियत
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा स्वीकृत इस परियोजना के तहत:
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मजबूत नींव: पहाड़ियों के ढलानों को वैज्ञानिक तरीके से मजबूत किया जाएगा ताकि मिट्टी और पत्थर सड़क पर न आ सकें।
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थ्री-लेयर प्रोटेक्शन: दीवार की तीन परतें न केवल भूस्खलन को रोकेंगी, बल्कि भविष्य में किसी भी बड़े मलबे के असर को भी कम करेंगी।
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सड़क का चौड़ीकरण: सुरक्षा दीवार के साथ-साथ सड़क को भी चौड़ा किया जा रहा है, जिससे गाड़ियों का आवागमन अधिक सुगम और सुरक्षित होगा।
प्रशासन का व्यापक रोडमैप
यह परियोजना केवल ‘नौ मील’ तक सीमित नहीं है। हिमाचल प्रदेश में नेशनल हाईवे को सुरक्षित बनाने के लिए NHAI ने एक बहुत बड़ा खाका तैयार किया है। रिपोर्टों के अनुसार, पूरे राज्य में करीब 150 ऐसे संवेदनशील स्थानों (vulnerable spots) की पहचान की गई है जिन्हें सुधारने के लिए 4,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
इसके अलावा, नौ मील क्षेत्र की सुरक्षा को और अभेद्य बनाने के लिए भविष्य में 125 करोड़ रुपये की लागत से ‘वायर डक्ट’ (गैलरी जैसी संरचना) बनाने का भी प्रस्ताव है, जिसे जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए मायने
मानसून के दौरान हिमाचल आने वाले पर्यटकों को अक्सर भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कई बार यात्री हाईवे पर फंस जाते हैं या यात्रा रद्द करनी पड़ती है। यह सुरक्षा दीवार न केवल यात्रा के समय को बचाएगी, बल्कि उन लोगों के लिए भी भरोसा पैदा करेगी जो मानसून के दौरान आवश्यक सेवाओं के लिए इस सड़क पर निर्भर रहते हैं।
फिलहाल, तकनीकी प्रक्रियाएं जारी हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद ‘नौ मील’ का यह खौफनाक सफर एक सुखद अनुभव में बदल जाएगा।




