
26 अगस्त2026, चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने राज्य भर में उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ करने वाले मिलावटी डेयरी उत्पादों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. मनोज कुमार ने आदेश जारी करते हुए ‘मार्गराइन’ को मक्खन के नाम पर बेचने, ‘एनालॉग पनीर’ और भ्रामक नामों से बिकने वाले घी पर 1 साल के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य में लागू कर दिया गया है।
मक्खन के नाम पर मार्गराइन पर लगाई गई रोक
होटल, रेस्टोरेंट, स्वीट शॉप्स और ढाबों पर पराठों के साथ वनस्पति तेल से बने मार्गराइन को खुले में असली ‘मक्खन’ या ‘माखन’ बताकर परोसा जा रहा था। नए नियमों के अनुसार, अब मार्गराइन या वेजिटेबल फैट स्प्रेड बेचने वाले कारोबारियों को इसे “मार्गराइन” या “वेजिटेबल फैट स्प्रेड — मक्खन नहीं” के स्पष्ट लेबल के साथ अलग से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।
जांच में 70% पनीर के सैंपल पाए गए फेल
हरियाणा में 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच लिए गए 285 पनीर सैंपलों में से 200 (लगभग 70%) मानक पर खरे नहीं उतरे। लैब जांच में 171 सैंपल घटिया गुणवत्ता के और 29 पूरी तरह असुरक्षित पाए गए। इनमें दूध के फैट की जगह वनस्पति तेल और स्टार्च की मिलावट की पुष्टि हुई है।
होटल, ढाबों और कैफे में एनालॉग पनीर पूरी तरह बैन
आदेश के तहत अब राज्य का कोई भी होटल, रेस्टोरेंट, कैटरर या क्लाउड किचन अपने किसी भी व्यंजन में ‘एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर’ का इस्तेमाल, निर्माण या भंडारण नहीं कर सकेगा। खाद्य सुरक्षा कानून के तहत उपभोक्ताओं को पनीर के नाम पर सोया या वनस्पति वसा से बना पनीर परोसना एक गंभीर व्यापारिक अपराध माना गया है।
‘पूजा घी’ और ‘दीया घी’ के नाम पर छलावे पर शिकंजा
बाजार में “दीया के लिए घी”, “पूजा घी”, “वनस्पति घी” या “हवन घी” के नाम से बेचे जा रहे उन उत्पादों पर भी रोक लगाई गई है, जिन्हें दूध के बजाय रसायनों, सुगंधित एजेंटों और वनस्पति वसा से तैयार किया जा रहा था। अब केवल वही उत्पाद ‘घी’ के नाम से बेचे जा सकेंगे जो FSSAI के निर्धारित मानकों पर खरे उतरेंगे।
नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSS Act) के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों की सामग्री तुरंत जब्त की जाएगी और दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के साथ जेल की सजा का प्रावधान भी लागू रहेगा।




