परीक्षा धोखाधड़ी के लिए सख्त सजा: राज्यसभा से भी पास हुआ ‘एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक’
NEET-UG विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली में सुचिता लाने के लिए सरकार का बड़ा कदम; गड़बड़ी करने वाली एजेंसियों पर लगेगा 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना

30 जुलाई, नई दिल्ली: लोकसभा से मंजूरी मिलने के एक दिन बाद, गुरुवार को राज्यसभा ने भी ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ (Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026) को पारित कर दिया है। इस विधेयक के दोनों सदनों से पास होने के बाद अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह कानून का रूप ले लेगा। हाल ही में हुए NEET-UG पेपर लीक विवाद और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद परीक्षा प्रणाली की शुचिता बनाए रखने के लिए सरकार यह कड़ा कदम लेकर आई है।
यह नया विधेयक पुराने ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024’ में संशोधन करता है और पेपर लीक व संगठित नकल माफिया के खिलाफ सजा व जुर्माने के प्रावधानों को पहले से कहीं ज्यादा सख्त बनाता है।
विपक्ष का वॉकआउट और भारी हंगामा
विधेयक पर विचार किए जाने से पहले राज्यसभा में विपक्ष ने भारी हंगामा किया। विपक्षी दलों ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग के मुद्दे पर नियम 267 के तहत चर्चा कराने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की मांग की थी। सभापति द्वारा इस मांग को खारिज किए जाने के बाद कई विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। भारी हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही को कई बार स्थगित भी करना पड़ा।
कानून में किए गए 5 बड़े बदलाव और सख्त प्रावधान
संशोधित विधेयक के तहत परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले व्यक्तियों, नकल माफियाओं और परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों पर भारी जुर्माना और लंबी जेल की सजा का प्रावधान किया गया है:
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व्यक्तियों के लिए बढ़ी सजा: परीक्षा में धोखाधड़ी या पेपर लीक में शामिल पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए न्यूनतम जेल की सजा को 3 साल से बढ़ाकर 5 साल (अधिकतम 10 साल) कर दिया गया है। वहीं अधिकतम जुर्माने की राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है।
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परीक्षा एजेंसियों पर 5 गुना जुर्माना: परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियां, आईटी कंपनियां या लॉजिस्टिक्स संभालने वाले सेवा प्रदाता (Service Providers) यदि धांधली में लिप्त पाए जाते हैं, तो उन पर अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
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8 साल के लिए ब्लैकलिस्ट: दोषी पाई जाने वाली एजेंसियों और कंपनियों को सार्वजनिक परीक्षाएं आयोजित करने के काम से बैन (Debar) करने की अवधि को 4 साल से बढ़ाकर 8 साल कर दिया गया है।
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संगठित अपराध पर ₹10 करोड़ का जुर्माना: परीक्षा में सक्रिय संगठित नकल गिरोहों और माफियाओं के खिलाफ न्यूनतम सजा 7 साल और अधिकतम जुर्माना 10 करोड़ रुपये तक तय किया गया है।
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फास्ट ट्रैक कोर्ट और समयबद्ध जांच: मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी। पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच को दो महीने के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा।




