लॉस एंजिल्स और आसपास के क्षेत्रों पर मंडराया महाभूकंप का खतरा: काजोन पास में फॉल्ट लाइनों पर बढ़ा दबाव
काजोन पास क्षेत्र पर शोध से बड़ा खुलासा; सैन एंड्रियास और सैन जैसिंटो फॉल्ट्स पर बढ़ा विनाशकारी भूकंप का खतरा

लॉस एंजिल्स (कैलिफोर्निया), 8 सितंबर 2026: हाल ही में हुए एक नए भौतिकी-आधारित मॉडल अध्ययन से खुलासा हुआ है कि दक्षिण कैलिफोर्निया की मुख्य भूकंपीय फॉल्ट लाइनों (Fault Lines) में तनाव (Stress) का स्तर पिछले 1,000 वर्षों में अपने उच्चतम बिंदु पर पहुंच गया है। ‘जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च: सॉलिड अर्थ’ में प्रकाशित इस शोध में लॉस एंजिल्स के उत्तर-पूर्व में स्थित काजोन पास (Cajon Pass) क्षेत्र का अध्ययन किया गया है, जहां सैन एंड्रियास (San Andreas) और सैन जैसिंटो (San Jacinto) फॉल्ट सिस्टम एक-दूसरे के बेहद करीब आते हैं।

काजोन पास: भूकंप का मुख्य ‘गेट’
शोधकर्ताओं के अनुसार, काजोन पास एक प्राकृतिक ‘अर्थक्वेक गेट’ की तरह काम करता है। यह क्षेत्र तय करता है कि कोई भूकंपीय दरार किसी एक ही फॉल्ट तक सीमित रहेगी या फिर दोनों प्रणालियों में फैलकर एक विनाशकारी और विशाल भूकंप का रूप ले लेगी।
1857 के प्रसिद्ध फोर्ट तेजोन (Fort Tejon) भूकंप के बाद से ही इन दोनों प्रमुख फॉल्ट्स पर तनाव लगातार जमा हो रहा है। वैज्ञानिकों ने 1,000 वर्षों के आंकड़े और ऐतिहासिक भू-सत्यता का अनुकरण करने के लिए रेडियोकार्बन डेटिंग, ट्री-रिंग डेटा और ऐतिहासिक जमीन फटने के रिकॉर्ड्स का इस्तेमाल किया है।
तनाव के आंकड़े चिंताजनक
मॉडलिंग के परिणामों के अनुसार:
-
सैन जैसिंटो फॉल्ट: इसके एक हिस्से पर तनाव लगभग 3.6 मेगापास्कल तक पहुंच चुका है।
-
सैन एंड्रियास फॉल्ट: इसके संबंधित क्षेत्र में तनाव 2.8 मेगापास्कल दर्ज किया गया है।
इन दोनों फॉल्ट्स पर एक साथ उच्च दबाव का बनना चिंता का विषय है, क्योंकि अतीत में जब भी ऐसी स्थितियां बनी हैं, भूकंपीय दरारें एक फॉल्ट से दूसरे फॉल्ट में फैली हैं।
किन क्षेत्रों पर पड़ सकता है असर?
यदि काजोन पास से होकर दोनों फॉल्ट्स में एक साथ दरार पैदा होती है, तो इसका सीधा असर लॉस एंजिल्स, सैन बर्नाडिनो, रिवरसाइड, कोचेला वैली और आसपास के कई प्रमुख बुनियादी ढांचा गलियारों (Infrastructure Corridors) पर पड़ेगा।
चेतावनी, भविष्यवाणी नहीं
शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह विश्लेषण किसी विशेष तारीख या समय पर भूकंप आने की भविष्यवाणी नहीं करता है। हालांकि, यह स्पष्ट रूप से बढ़े हुए खतरे की ओर इशारा करता है और संबंधित अधिकारियों व नागरिकों को आपातकालीन तैयारियों को दुरुस्त करने की चेतावनी देता है।




