आकाश गंगा: गोमुख के ऊपर बहने वाली गंगा का दिव्य स्वरूप
निए गंगोत्री क्षेत्र के शिवलिंग पर्वत और तपोवन से जुड़े इस प्राकृतिक रहस्य के बारे में

उत्तरकाशी, उत्तराखंड: देवभूमि उत्तराखंड अपनी अलौकिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व के लिए जानी जाती है। इसी कड़ी में एक बेहद रोमांचक जानकारी सामने आई है, जो प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देगी। गंगोत्री क्षेत्र में स्थित शिवलिंग पर्वत की तलहटी में एक ऐसी नदी बहती है, जिसे ‘आकाश गंगा’ के नाम से जाना जाता है।
क्या है आकाश गंगा का रहस्य?
संसद टीवी की एक हालिया जानकारी के अनुसार, गंगोत्री के गोमुख के पास स्थित शिवलिंग पर्वत, जिसकी ऊँचाई 6,543 मीटर है, के चरणों से ‘आकाश गंगा’ नदी का उद्गम होता है। यह नदी तपोवन के शांत मैदानों से होकर बहती है और अंततः गंगोत्री ग्लेशियर में समा जाती है।

दिव्य और आलौकिक दृश्य
आकाश गंगा का नज़ारा रात के समय अत्यंत स्पष्ट और विहंगम होता है। स्थानीय मान्यताओं और अनुभवों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन तपोवन में आकाश गंगा का दृश्य अति अद्भुत, आलौकिक, भव्य और दिव्य स्वरूप धारण कर लेता है, जिसे देखकर कोई भी मंत्रमुग्ध हो सकता है।

तीर्थयात्रियों के लिए विशेष आकर्षण
शिवलिंग पर्वत गंगोत्री हिमनद (Gaumukh) के मुहाने के पास स्थित है, जिसे माँ गंगा का उद्गम स्थल माना जाता है। तपोवन में अपनी शांत गति से बहने के बाद, यह नदी एक तेज ढलान से उतरती है, जिसे पार करके ही पर्यटक और श्रद्धालु तपोवन तक पहुँचते हैं।

यह स्थान न केवल ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन गंतव्य है, बल्कि हिमालय की गोद में छिपे प्राकृतिक रहस्यों को समझने का एक शानदार अवसर भी प्रदान करता है।




