Haridwar: मनसा देवी मंदिर का ‘जेब-मुक्त’ अभियान, पुजारियों के लिए नया ड्रेस कोड जारी
पारदर्शिता के लिए मंदिर प्रशासन की अनूठी पहल, दान पेटी में ही जाएगा भक्तों का चढ़ावा
हरिद्वार, 16 जुलाई 2026: देश भर के प्रमुख धार्मिक संस्थानों में दान प्रबंधन और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर चल रही बहस के बीच, हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर ने एक बड़ा कदम उठाया है। मंदिर प्रशासन ने पुजारियों और कर्मचारियों के लिए ड्यूटी के दौरान ऐसी पोशाक पहनना अनिवार्य कर दिया है जिसमें जेब (pocket) न हो।
दान में हेरफेर रोकने की पहल
इस अनूठी पहल के बारे में जानकारी देते हुए मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष रविंद्र पुरी ने बताया कि यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भक्तों द्वारा दिया गया दान सीधे मंदिर के खजाने में जाए, न कि किसी पुजारी की जेब में। उन्होंने कहा, “जब मैंने मंदिर में पुजारियों और कर्मचारियों को देखा, तो पाया कि कई के कुर्ते में जेबें थीं। अब सभी पुजारियों और कर्मचारियों को बिना जेब वाली पोशाक पहनने का निर्देश दिया गया है, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है।”
हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में पुजारियों और कर्मचारियों के कुर्ते चेक किए गए। बताया जा रहा है कि चढ़ावे की राशि को हेरफेर से बचाने के लिए संबंधित पुजारियों और कर्मचारियों से बिना जेब के कुर्ते पहनने को कहा गया है। pic.twitter.com/Njq35yPj7P
— Akshay Pratap Singh (@AkshayPratap94) July 16, 2026
65 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी
रविंद्र पुरी ने बताया कि मंदिर परिसर की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 65 सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई भी व्यक्ति कैमरे में किसी गलत काम या हेरफेर करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पृष्ठभूमि: दान चोरी का राष्ट्रव्यापी मुद्दा
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अयोध्या के राम मंदिर में दान में कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर देश भर में चर्चा और विवाद छिड़ा हुआ है। इसी तरह की शिकायतें केरल के सबरीमाला मंदिर, गुजरात के अंबाजी मंदिर और बद्रीनाथ मंदिर से भी सामने आई हैं, जिसके बाद मंदिरों में दान प्रबंधन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।




