अमरनाथ यात्रा 2026: शुरू हो रहा है बाबा बर्फानी का महासंगम
3 जुलाई से शुरू होगी 57 दिनों की कठिन यात्रा, जानें गुफा से जुड़ी अमर कथा का रहस्य

30 जून, 2026, नई दिल्ली: हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए जम्मू-कश्मीर की दुर्गम पहाड़ियों में स्थित अमरनाथ गुफा की कठिन यात्रा करते हैं। इस वर्ष की पवित्र अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई, 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त, 2026 तक चलेगी। रक्षाबंधन के पावन पर्व के साथ संपन्न होने वाली यह यात्रा कुल 57 दिनों तक चलेगी, जिसके लिए पंजीकरण प्रक्रिया 15 अप्रैल से ही शुरू हो गई थी।
प्राकृतिक हिमलिंग और आस्था का केंद्र
अमरनाथ गुफा में हर साल प्राकृतिक रूप से बर्फ से बनने वाला ‘हिमलिंग’ श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण होता है। माना जाता है कि यह शिवलिंग भगवान शिव का साक्षात स्वरूप है। भक्त “हर हर महादेव” के उद्घोष के साथ दुर्गम रास्तों को पार करते हुए बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

क्या है ‘अमरनाथ’ नाम के पीछे का पौराणिक रहस्य?
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से अमरत्व का रहस्य (अमर कथा) जानने की इच्छा व्यक्त की। भगवान शिव यह भली-भांति जानते थे कि यदि कोई भी जीव इस दिव्य ज्ञान को सुन लेगा, तो वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाएगा। इसलिए, महादेव ने एक ऐसी गुप्त जगह चुनी जहां कोई भी अन्य प्राणी न हो।
कथा के अनुसार, उन्होंने हिमालय की एक एकांत गुफा का चयन किया, जिसे आज हम ‘अमरनाथ गुफा’ के नाम से जानते हैं। कथा सुनाने से पहले भगवान शिव ने यह सुनिश्चित किया कि गुफा में कोई अन्य जीवित प्राणी मौजूद न हो। हालांकि, अनजाने में वहां दो कबूतरों के अंडे रह गए थे। जब भगवान शिव माता पार्वती को अमर कथा सुना रहे थे, तब उन अंडों से निकले कबूतरों ने पूरी कथा सुन ली।
माना जाता है कि अमर कथा सुनने के कारण वे दोनों कबूतर अमर हो गए। आज भी कई भक्त इस गुफा के पास उसी कबूतर के जोड़े को देखने का दावा करते हैं, जो इस पवित्र स्थान की महत्ता और रहस्य को और भी गहरा कर देते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए, अमरनाथ यात्रा केवल एक पहाड़ी यात्रा नहीं, बल्कि भक्ति और अटूट विश्वास का एक आध्यात्मिक सफर है। बाबा बर्फानी के दर्शन और अमर कथा की यह गाथा हर साल लाखों लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है।




