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हरियाणा पुलिस की बड़ी कामयाबी: 1930 हेल्पलाइन की मुस्तैदी से बचाए गए 1 करोड़ रुपये

'बॉस स्कैम' के जरिए ज्वेलरी शोरूम कर्मचारियों से हुई थी ठगी, 'गोल्डन ऑवर' में शिकायत मिलने पर शत-प्रतिशत राशि सुरक्षित

चंडीगढ़, 18 सितंबर 2026: हरियाणा पुलिस की मुस्तैदी: 1930 हेल्पलाइन की त्वरित कार्रवाई से बचाए गए 1 करोड़ रुपये, ‘बॉस स्कैम’ का हुआ पर्दाफाश

हरियाणा पुलिस की साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 की प्रभावी और समय पर की गई कार्रवाई से एक बड़े साइबर फ्रॉड को विफल कर दिया गया है। जालसाजों द्वारा ‘बॉस स्कैम’ के जरिए ठगी गई 1 करोड़ रुपये की पूरी राशि को सुरक्षित बचा लिया गया है। इस सराहनीय सफलता पर डीजीपी अजय सिंघल ने 1930 की पूरी टीम को बधाई दी है।

कैसे दिया गया ‘बॉस स्कैम’ को अंजाम?

करनाल के नेहरू प्लेस स्थित एक ज्वेलरी शोरूम के कर्मचारियों को एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप मैसेज मिला। इस फर्जी प्रोफाइल पर शोरूम मालिक विकास की फोटो और नाम का इस्तेमाल किया गया था।

जालसाजों ने कर्मचारियों को झांसे में लेते हुए आरटीजीएस के माध्यम से तुरंत एक बैंक खाते में 1 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के निर्देश दिए।

मालिक का नाम और डीपी देखकर कर्मचारियों ने बिना संदेह के पूरी राशि ट्रांसफर कर दी।

शाम करीब 5:56 बजे शोरूम मालकिन ममता बंसल को बैंक से पैसे कटने का मैसेज मिलने पर इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

गोल्डन ऑवर में शिकायत बनी जीवन रक्षक

फ्रॉड का पता चलते ही पीड़ित परिवार ने बिना एक पल गंवाए तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज कराई।

तत्काल एक्शन: शिकायत मिलते ही 1930 की बैंक फॉलो-अप टीम ने बिना देर किए संबंधित बैंकिंग चैनलों के साथ समन्वय स्थापित किया।

शत-प्रतिशत रिकवरी: टीम की तत्परता और सही समय पर उठाए गए कदमों के कारण जालसाजों के हाथ लगने से पहले ही पूरी 1 करोड़ रुपये की राशि सुरक्षित हो गई।

डीजीपी अजय सिंघल की अपील

हरियाणा पुलिस के डीजीपी अजय सिंघल ने साइबर टीम की पीठ थपथपाते हुए कहा कि साइबर अपराध के मामलों में ‘गोल्डन ऑवर’ (शुरुआती समय) सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने आम नागरिकों और व्यवसायिक संस्थानों से अपील की है कि:

किसी भी साइबर फ्रॉड की स्थिति में घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत 1930 पर कॉल करें।

केवल व्हाट्सएप पर नाम और तस्वीर देखकर किसी निर्देश पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।

बड़ी रकम के लेन-देन या ट्रांसफर से पहले संबंधित अधिकारी या मालिक के आधिकारिक नंबर पर फोन करके स्वतंत्र रूप से सत्यापन (Verification) जरूर करें।

सावधानी ही बचाव है: यदि आपको किसी भी संदेश में तत्काल भुगतान करने या गोपनीयता बनाए रखने का दबाव बनाया जाए, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 को दें।

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