सोमवती अमावस्या पर कुरुक्षेत्र ब्रह्म सरोवर में उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी

धर्मनगरी कुरुक्षेत्र का ऐतिहासिक ब्रह्म सरोवर सोमवती अमावस्या के अवसर पर आस्था के महासंगम का साक्षी बना. तड़के सुबह से ही सरोवर के घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र जल में स्नान कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की. पूरे परिसर में भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या पर ब्रह्म सरोवर में स्नान, दान और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है. श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और जल तर्पण किया. विभिन्न घाटों पर धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ का क्रम दिनभर चलता रहा.
एक श्रद्धालु ने कहा कि, “सोमवती अमावस्या पर ब्रह्म सरोवर में स्नान का विशेष महत्व है. हम हर वर्ष यहां आकर स्नान करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. यहां आकर मन को शांति मिलती है.” वहीं, एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि, “हम हर अमावस्या को यहां पितरों के तर्पण के लिए आते हैं.”
तीर्थ पुरोहित पंडित राकेश गोस्वामी ने बताया कि, “इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति और पितृदोष निवारण के लिए कुरुक्षेत्र पहुंचते हैं. धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं. सोमवती अमावस्या पर कुरुक्षेत्र में किया गया स्नान, दान और पूजा-पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है. यहां हजारों-लाखों लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए आते हैं. मान्यता है कि यहां किया गया दान और तर्पण सीधे पूर्वजों तक पहुंचता है और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है.”
लगातार स्नान और पानी के बहाव के कारण सरोवर की सीढ़ियां अत्यधिक फिसलन भरी हो गईं. कई श्रद्धालु संतुलन खोकर फिसल गए. विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी. श्रद्धालुओं ने घाटों पर सुरक्षा और सफाई व्यवस्था को और बेहतर बनाने की मांग की.




