क्या वायनाड आपदा ‘मानव निर्मित’ थी? रिपोर्ट से उठे बड़े सवाल
वायनाड आपदा पर एमिकस क्यूरी का कड़ा रुख, लापरवाही के लिए जाँच के निर्देश

18 जुलाई, कोच्चि: केरल के वायनाड स्थित अनाक्कंपोयिल-कल्लाडी-मेप्पाडी ट्विन टनल परियोजना स्थल पर 7 जुलाई को हुआ भूस्खलन कोई अचानक आई प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि एक ऐसी त्रासदी थी जिसे बार-बार चेतावनी के बावजूद रोका नहीं गया। केरल उच्च न्यायालय में एमिकस क्यूरी द्वारा दायर की गई रिपोर्ट ने राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
“पाँच बार दी गई थी चेतावनी”
एमिकस क्यूरी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा है कि इस आपदा के संकेत पहले ही मिल चुके थे। रिपोर्ट में दर्ज है, “प्राथमिक जांच से यह स्पष्ट है कि 7 जुलाई की कल्लाडी आपदा अनपेक्षित नहीं थी; इसे लिखित रूप में पांच बार पहले ही भांप लिया गया था।”
रिपोर्ट के अनुसार, वायनाड के जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) और जिला प्रशासन ने केरल PWD और कार्यकारी एजेंसी को मिट्टी हटाने के लिए पाँच बार लिखित निर्देश दिए थे, ताकि किसी भी संभावित आपदा को टाला जा सके। हालांकि, इन चेतावनियों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया।
🇮🇳: Three Dead, Several Missing as Landslide Hits Wayanad Tunnel Site; Kerala CM Blames Contractor Negligence
Three migrant workers died and several others (5–7) are feared trapped after a landslide hit the Anakkampoyil-Kalladi-Meppadi twin tunnel project site at Kalladi near… pic.twitter.com/HKIQYRGVan
— World In Last 24hr (@world24x7hr) July 8, 2026
सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती
यह मामला जुलाई 2024 में मुंडक्कई-चूरलमाला में हुए विनाशकारी भूस्खलन के बाद स्वतः संज्ञान (suo motu) लिए गए एक मामले के जवाब में दायर किया गया है। रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) की शर्तों का पालन सुनिश्चित करना राज्य सरकार और PWD की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्माण कार्य कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड को सौंपने के बावजूद सरकार अपनी जवाबदेही से मुक्त नहीं हो सकती। PWD द्वारा जारी मिनट्स का हवाला देते हुए बताया गया है कि खुदाई की गई मिट्टी के बड़े ढेर ‘सॉइल पाइपिंग’ और ढलान के अस्थिर होने का बड़ा कारण बने। साथ ही, ठेकेदार द्वारा लगाई गई रिटेनिंग वॉल और तिरपाल का कवर पानी के रिसाव को रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुआ।

सुधार और सुरक्षा के कड़े निर्देश
भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए एमिकस क्यूरी ने केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (KSDMA) को कई सुझाव दिए हैं:
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SOP लागू करना: भूस्खलन के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी करना, जिसमें मानसून के दौरान निर्माण कार्य रोकने की समय-सीमा तय हो।
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तकनीकी निगरानी: साइट पर स्वचालित वर्षा गेज (rain gauges) और ढलान-आंदोलन सेंसर (slope-movement sensors) स्थापित करना अनिवार्य हो।
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सुरक्षा उपाय: मिट्टी के ढेर की ऊँचाई और ढलान की सीमा निर्धारित करना तथा जल निकासी के उचित प्रबंध करना।
कानूनी कार्रवाई की मांग
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन मौतों के लिए भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत जांच होनी चाहिए। इसमें लापरवाही से मौत (धारा 106) जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। जांच का दायरा केवल ठेकेदार तक सीमित न रखकर उन सभी अधिकारियों और एजेंसियों तक बढ़ाया जाना चाहिए, जिनकी लापरवाही या अनदेखी के कारण लिखित चेतावनियों के बावजूद वहां मिट्टी के ढेर मौजूद रहे।




