7 निडर महिलाएं जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत को दी चुनौती और गढ़ी भारत की आजादी की गाथा
अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंकने वाली 7 महान भारतीय वीरांगनाएं

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नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026: भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास ऐसे महान वीरों और वीरांगनाओं के बलिदान से भरा पड़ा है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। देश के स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं का योगदान अभूतपूर्व रहा है। इस श्रृंखला में ऐसी ही 7 निडर महिलाओं के अदम्य साहस और योगदान को याद किया गया है, जिन्होंने औपनिवेशिक शासन की नींव हिला दी थी।
आइए जानें भारत की इन महान वीरांगनाओं के ऐतिहासिक योगदान के बारे में:
1. रानी वेलु नचियार (Rani Velu Nachiyar)
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से कई दशक पहले ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ हथियार उठाने वाली पहली भारतीय रानी ‘वीरमंगई’ रानी वेलु नचियार थीं। शिवगंगा की रानी नचियार ने ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ युद्ध लड़ा और मानव बम का पहला ऐतिहासिक प्रयोग कर अंग्रेजों के हथियार डिपो को नष्ट कर अपना साम्राज्य वापस हासिल किया था।

2. कैप्टन लक्ष्मी सहगल (Captain Lakshmi Sahgal)
आजाद हिंद फौज (INA) की पहली महिला रेजिमेंट ‘रानी झांसी रेजिमेंट’ की कमान संभालने वाली कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने ब्रिटिश सेना के दांत खट्टे कर दिए थे। पेशे से डॉक्टर रहीं लक्ष्मी सहगल ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आह्वान पर देश की आजादी के लिए हथियार उठाए और अग्रिम मोर्चे पर लड़ाई लड़ी।

3. सरोजिनी नायडू (Sarojini Naidu)
‘भारत कोकिला’ के नाम से प्रसिद्ध सरोजिनी नायडू न केवल एक प्रख्यात कवयित्री थीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की अग्रणी नेता भी थीं। उन्होंने नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई तथा स्वतंत्रता के बाद देश की पहली महिला राज्यपाल बनीं।

4. सुचेता कृपलानी (Sucheta Kripalani)
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाली सुचेता कृपलानी ने महात्मा गांधी के साथ मिलकर स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं को संगठित किया। 15 अगस्त 1947 को संविधान सभा में उन्होंने ‘वंदे मातरम’ गाया था और बाद में उत्तर प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं।

5. कस्तूरबा गांधी (Kasturba Gandhi)
‘बा’ के नाम से जानी जाने वाली कस्तूरबा गांधी ने महात्मा गांधी के हर आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर भाग लिया। सत्याग्रह और असहयोग आंदोलन से लेकर भारत छोड़ो आंदोलन तक, कस्तूरबा ने महिलाओं के अधिकारों और देश की आजादी के लिए कई बार जेल यात्राएं सहीं।

6. अरुणा आसफ अली (Aruna Asaf Ali)
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बॉम्बे के गोवालिया टैंक मैदान में तिरंगा फहराकर अंग्रेजों को चुनौती देने वाली ‘1942 की क्रांति की जननी’ अरुणा आसफ अली थीं। उन्होंने गुप्त रूप से स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला जलाए रखी।

7. मातंगिनी हाजरा (Matangini Hazra)
‘गांधी बूढ़ी’ के नाम से मशहूर 73 वर्षीय मातंगिनी हाजरा ने 1942 में पश्चिम बंगाल के तमलूक में भारत छोड़ो आंदोलन के एक जुलूस का नेतृत्व किया था। हाथों में तिरंगा लिए जब अंग्रेज सिपाहियों ने उन पर गोलियां चलाईं, तब भी वे ‘वंदे मातरम’ का उद्घोष करते हुए आगे बढ़ती रहीं और शहीद हो गईं।
ये 7 वीरांगनाएं भारत के स्वतंत्रता संग्राम की वे मशाल हैं, जिनकी वीरता और देशभक्ति आज भी हर भारतीय को देश सेवा के लिए प्रेरित करती है।
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