E20 विवाद: मारुति सुजुकी को बड़ा झटका, रायपुर कोर्ट ने पुरानी कार वापस लेकर नई देने का दिया आदेश
उपभोक्ता आयोग की सख्त टिप्पणी: कंपनी को कार बदलने के साथ हर्जाना भी भरना होगा

रायपुर, 16 जुलाई 2026: देश भर में E20 (एथेनॉल-ब्लेंडेड) पेट्रोल को लेकर जारी बहस के बीच, छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आयोग ने मारुति सुजुकी और उसके स्थानीय डीलर को निर्देश दिया है कि वे एक ग्राहक की ग्रैंड विटारा स्ट्रांग हाइब्रिड (Grand Vitara Strong Hybrid) कार को वापस लें और उसके बदले उसी मॉडल की एक नई, E20-अनुकूल कार प्रदान करें।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला रायपुर के 41 वर्षीय निवासी डॉ. प्रेमराज देवता से जुड़ा है। उन्होंने मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा स्ट्रांग हाइब्रिड जेटा प्लस खरीदी थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि जैसे ही E20 पेट्रोल व्यापक रूप से उपलब्ध हुआ, उनकी गाड़ी में बार-बार तकनीकी खराबी आने लगी। डॉ. देवता ने तर्क दिया कि खरीद के समय उन्हें यह स्पष्ट नहीं बताया गया था कि वाहन पूरी तरह से एथेनॉल-मिश्रित ईंधन के अनुकूल नहीं है।
इस खराबी से परेशान होकर डॉ. देवता ने रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और डीलरशिप, ‘नेक्सा मैग्नेटो’ (स्काई ऑटो मोबाइल) के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

आयोग का फैसला और निर्देश
आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीज की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। आयोग ने मारुति सुजुकी और डीलर को ‘सेवा में कमी’ (deficiency in service) का दोषी पाया। अपने 14 जुलाई के आदेश में, आयोग ने निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:
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कार की रिप्लेसमेंट: मारुति और डीलर को 45 दिनों के भीतर पुरानी कार वापस लेकर उसी मॉडल की एक नई E20-संगत कार देनी होगी।
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विकल्प: यदि 45 दिनों के भीतर नई कार नहीं दी जाती है, तो उन्हें वाहन की पूरी कीमत (18,29,000 रुपये), आरटीओ शुल्क (1,86,850 रुपये) और बीमा प्रीमियम (34,644 रुपये) सहित कुल 20,50,494 रुपये का भुगतान करना होगा।
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हर्जाना और कानूनी खर्च: वाहन के प्रतिस्थापन के बावजूद, आयोग ने मानसिक पीड़ा के लिए 1 लाख रुपये और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 10,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।
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ब्याज का प्रावधान: यदि यह राशि समय पर नहीं चुकाई जाती है, तो आदेश की तारीख से भुगतान की वास्तविक तारीख तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
E20 पेट्रोल और वाहन प्रदर्शन
यह फैसला उन कार मालिकों के लिए एक राहत के रूप में देखा जा रहा है जो नई ईंधन नीति के कारण अपने वाहनों में तकनीकी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। गौरतलब है कि IIT कानपुर द्वारा E20 ईंधन के प्रदर्शन पर किए गए परीक्षणों के बावजूद, जमीनी स्तर पर ग्राहकों को आ रही समस्याएँ अब कानूनी गलियारों में एक प्रमुख विषय बन गई हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी पहले यह स्पष्ट किया था कि यदि कोई E20 का उपयोग नहीं करना चाहता, तो उनके पास शुद्ध पेट्रोल चुनने का विकल्प होना चाहिए।
यह आदेश मारुति सुजुकी जैसी ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि उन्हें अपने उत्पादों की तकनीकी अनुकूलता के बारे में ग्राहकों को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।




