भारत में एशियाई शेरों का कुनबा बढ़ा: 10 वर्षों में आबादी 523 से बढ़कर हुई 891, दायरा भी 35,000 वर्ग किमी पहुंचा
विश्व शेर दिवस पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने साझा किए आंकड़े, 'प्रोजेक्ट लायन' और स्थानीय समुदायों के सहयोग से 70% से अधिक बढ़ी शेरों की संख्या

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नई दिल्ली, 10 अगस्त: भारत में एशियाई शेरों के संरक्षण अभियान को बड़ी सफलता मिली है। ‘विश्व शेर दिवस’ ( World Lion Day) के अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि देश में एशियाई शेरों की आबादी वर्ष 2015 के 523 से बढ़कर वर्ष 2025 में 891 हो गई है। पिछले एक दशक में शेरों की संख्या में 70% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
‘प्रोजेक्ट लायन’ और स्थानीय भागीदारी का परिणाम
पर्यावरण मंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय वन अधिकारियों, वन्यजीव संरक्षणवादियों और स्थानीय समुदायों के अथक प्रयासों को दिया।
Under the environmentally sensitive leadership of PM Shri @narendramodi ji, the lions' range has expanded from around 30,000 sq. km in 2020 to nearly 35,000 sq. km, covering 11 districts.
On #WorldLionDay, I write in @htTweets on India scripted the successful conservation… pic.twitter.com/ecfMiDKWu8
— Bhupender Yadav (@byadavbjp) August 10, 2026
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पर्यावास सुधार (Habitat Enhancement): शेरों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित और समृद्ध बनाना।
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स्वास्थ्य और रोग निगरानी: शेरों के लिए पशु चिकित्सा सहायता और नियमित हेल्थ ट्रैकिंग सुविधा।
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आधुनिक तकनीक का प्रयोग: जीपीएस, रेडियो कॉलर और कैमरा ट्रैप के माध्यम से शेरों की वैज्ञानिक निगरानी।
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मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी: स्थानीय समुदायों के साथ तालमेल और जागरूकता अभियानों के जरिए सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना।
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गुजरात के गिर और ग्रेटर गिर क्षेत्र में फैला दायरा
एशियाई शेर प्राकृतिक रूप से केवल भारत के गुजरात राज्य (गिर राष्ट्रीय उद्यान एवं आसपास के बृहद गिर क्षेत्र) में पाए जाते हैं। शेरों की 16वीं गणना के अनुसार, इनकी संख्या में लगातार हो रही वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।
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