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क्या अनशन खत्म करेंगे सोनम वांगचुक? पत्नी गीतांजलि ने कह दी बड़ी बात!

राजनीतिक दलों से मुलाकात और शिक्षा सुधारों के आश्वासन पर टिकी नजरें

19 जुलाई, नई दिल्ली: प्रसिद्ध शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। उनकी पत्नी और सामाजिक उद्यमी गीतांजलि आंगमो ने संकेत दिया है कि यदि राजनीतिक दल वांगचुक से मुलाकात करते हैं और आगामी ‘मानसून सत्र’ में शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करने का ठोस आश्वासन देते हैं, तो वांगचुक अपना अनशन समाप्त कर सकते हैं।

क्या है वर्तमान स्थिति?

पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य खराब होने के कारण 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस द्वारा सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वांगचुक के स्वास्थ्य पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी चिंता जताई है और अधिकारियों को नियमित निगरानी के निर्देश दिए हैं। उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो ने अस्पताल के बाहर प्रेस वार्ता में कहा कि वांगचुक का उद्देश्य केवल सरकार पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता लाना है।

अनशन की पृष्ठभूमि: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और परीक्षा घोटाले

यह आंदोलन शिक्षा क्षेत्र में हो रही धांधलियों और अनियमितताओं के खिलाफ शुरू हुआ था। वांगचुक, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के समर्थन में अनशन पर बैठे हैं, जो हाल ही में हुई NEET-UG समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रही है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की है।

सोनम वांगचुक ने मई में मेडिकल प्रवेश परीक्षा रद्द होने के बाद उपजे आक्रोश के बीच इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया था। उनका मानना है कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और इसमें आमूल-चूल बदलाव की आवश्यकता है।

राजनीतिक सरगर्मी

जैसे-जैसे संसद का मानसून सत्र करीब आ रहा है, वांगचुक का यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में भी जोर पकड़ रहा है। आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है और विपक्ष से इस मुद्दे पर एकजुट होने का आग्रह किया है।

सोनम वांगचुक, जो लद्दाख में अपनी शिक्षा और जलवायु संरक्षण संबंधी नवाचारों (जैसे ‘आइस स्तूप’) के लिए जाने जाते हैं, अब पूरे देश के छात्रों और युवाओं के लिए एक बड़े संघर्ष का चेहरा बन गए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार या विपक्षी दल इस मांग पर कोई सार्थक कदम उठाते हैं, जिससे वांगचुक का अनशन समाप्त हो सके।

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