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अमरनाथ यात्रा: तेज़ी से पिघल रहा है बाबा बर्फानी का हिमलिंग

बढ़ते तापमान और भीड़ के चलते शिवलिंग का आकार घटकर एक फीट रह गया, प्रशासन ने श्रद्धालुओं से सतर्क रहने की अपील की

6 जुलाई, श्रीनगर: अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए उमड़ रहे लाखों श्रद्धालुओं के बीच एक चिंताजनक खबर सामने आई है। इस वर्ष 3 जुलाई से शुरू हुई अमरनाथ यात्रा के दौरान पवित्र हिमलिंग का आकार बहुत तेजी से घट रहा है। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, प्राकृतिक रूप से बनने वाले इस शिवलिंग का आकार अब घटकर केवल एक फीट के आसपास रह गया है।

क्यों पिघल रहा है शिवलिंग?

विशेषज्ञों और यात्रा से जुड़े सूत्रों के अनुसार, शिवलिंग के आकार में यह कमी मुख्य रूप से बढ़ते तापमान और गुफा के भीतर मानवीय गतिविधियों के कारण हो रही है। हिमलिंग का निर्माण गुफा की छत से टपकने वाले पानी के जमने से होता है। जैसे-जैसे यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती है, गुफा के अंदर का तापमान भी बढ़ जाता है, जिससे बर्फ के जमने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और पिघलाव की गति बढ़ जाती है।

श्रद्धालुओं को हो रही कठिनाई

यात्रियों की भारी संख्या और टोकन सिस्टम की जटिलताओं के कारण भी श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जम्मू में हज़ारों यात्री अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं। टोकन, आरएफआईडी कार्ड (RFID Card) और सीमित स्लॉट्स की प्रक्रिया के कारण कई भक्त एक सप्ताह से अधिक समय से जम्मू में डेरा डाले हुए हैं, जिससे उनके होटल और खाने-पीने का खर्च भी बढ़ गया है।

यात्रा का प्रबंधन और नियम

  • यात्रा की अवधि: 3 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक (कुल 57 दिन)।

  • मार्ग: यात्रा पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों से सुचारू रूप से चल रही है।

  • अपील: प्रशासन ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे केवल अपनी आवंटित तिथि पर ही यात्रा के लिए पहुंचें। बिना रजिस्ट्रेशन के पहुंचने वाले यात्रियों के लिए व्यवस्था करना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

वैज्ञानिकों का मानना है कि अमरनाथ का शिवलिंग एक प्राकृतिक ‘आइस स्टैलेग्माइट’ (Ice Stalagmite) है, जो पूरी तरह से मौसम और तापमान पर निर्भर करता है। तापमान में मामूली वृद्धि भी इसे तेजी से पिघला सकती है। हालांकि, भक्तों की आस्था इस पर अडिग है और हज़ारों लोग रोज़ाना ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों के साथ गुफा की ओर प्रस्थान कर रहे हैं।

श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले मौसम की जानकारी और श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) के आधिकारिक निर्देशों का पालन अवश्य करें।

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