हिमाचल में आज बजेगा भूकंप और बादल फटने का सायरन, आपदा से पहले तैयारी की बड़ी कवायद

प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती चुनौतियों और आपात परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश आज (सोमवार, 15 जून को) एक बड़े अभ्यास का गवाह बनेगा. प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ आयोजित होने वाली व्यापक मॉक ड्रिल के माध्यम से प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और आपदा प्रबंधन तंत्र की तत्परता को जमीनी स्तर पर जांचा जाएगा. भूकंप और बादल फटने का सायरन बजाकर आपदा से पहले की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी.
इस विशेष अभ्यास में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के विशेषज्ञ अधिकारी मार्गदर्शन देंगे, जबकि अर्द्धसैनिक बलों के जवान भी भागीदारी निभाएंगे. इस दौरान भूकंप, भूस्खलन, बादल फटने और अन्य प्राकृतिक आपदाओं जैसी परिस्थितियों का वास्तविक परिदृश्य तैयार कर राहत एवं बचाव कार्यों की क्षमता का परीक्षण किया जाएगा.
वहीं, किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने, विभागों के बीच तालमेल को परखने और प्रतिक्रिया तंत्र की वास्तविक क्षमता का आकलन करने के लिए एक उच्चस्तरीय वर्चुअल टेबल टॉप अभ्यास शुक्रवार, 12 जून को आयोजित किया गया. इस अभ्यास में भूकंप, बादल फटना, फ्लैश फ्लड और वनाग्नि जैसी संभावित आपदाओं के काल्पनिक लेकिन वास्तविक परिस्थितियों से मेल खाते परिदृश्यों का अनुकरण किया गया, ताकि संकट की घड़ी में विभिन्न एजेंसियों की तत्परता और समन्वय का परीक्षण किया जा सके.
मुख्य सचिव केके पंत की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण अभ्यास में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए), एनडीआरएफ, सेना, आईटीबीपी, मौसम विज्ञान विभाग सहित राज्य और जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया. इस दौरान आपदा प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्थाओं, मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) और संचार तंत्र की प्रभावशीलता की गहन समीक्षा की गई. अधिकारियों ने संभावित चुनौतियों, संसाधनों की उपलब्धता और राहत-बचाव कार्यों में आने वाली बाधाओं पर भी चर्चा की.
मुख्य सचिव ने कहा कि पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों और संवेदनशील जलवायु के कारण हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील राज्य है. ऐसे में समय-समय पर आयोजित होने वाले टेबल टॉप अभ्यास और मॉक ड्रिल न केवल प्रशासनिक तैयारियों को मजबूत करते हैं, बल्कि आपात स्थिति में त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं. इस मॉक ड्रिल के लिए विस्तृत काल्पनिक परिदृश्य तैयार किए जाएंगे. इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर मौजूद कमियों की पहचान करना और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाना है.



