सीमा सड़क संगठन (BRO) ने कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग को किया बहाल, भूस्खलन के बाद त्वरित कार्यवाही
देहरादून के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में 10 जुलाई को हुए भीषण भूस्खलन के बाद, 'प्रोजेक्ट हीराक' की टीम ने युद्धस्तर पर काम करते हुए रविवार तक रास्ता तीर्थयात्रियों और वाहनों के लिए सुगम बनाया

12 जुलाई, देहरादून: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में प्रकृति की चुनौती का सामना करते हुए, सीमा सड़क संगठन (BRO) ने एक बार फिर अपनी कार्यक्षमता का लोहा मनवाया है। कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले सड़क मार्ग पर 10 जुलाई को हुए भीषण भूस्खलन (landslide) के बाद, BRO की ‘प्रोजेक्ट हीराक’ (Project Hirak) टीम ने युद्धस्तर पर काम करते हुए रविवार तक रास्ता बहाल कर दिया है।
आपदा और त्वरित प्रतिक्रिया
10 जुलाई को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हुए भूस्खलन के कारण यातायात पूरी तरह ठप हो गया था। यह क्षेत्र न केवल चुनौतीपूर्ण भौगोलिक स्थिति के लिए जाना जाता है, बल्कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के सुचारू संचालन के लिए एक लाइफलाइन भी है।
BRO के अनुसार, घटना की सूचना मिलते ही ‘प्रोजेक्ट हीराक’ की टीमों को तुरंत तैनात किया गया। इन कठिन परिस्थितियों में, जहां मलबे का बड़ा हिस्सा और पत्थरों के गिरने का डर बना हुआ था, BRO के जवानों ने बिना समय गंवाए मलबे को हटाने का काम शुरू किया। निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप, रविवार तक मार्ग को तीर्थयात्रियों और आवश्यक आपूर्ति वाले वाहनों की आवाजाही के लिए सुरक्षित और सुगम बना दिया गया।
#BROIndia #KailashMansarovarYatra2026 #UttarakhandConnectivity #BorderConnectivity
⛰️ When nature poses challenges, #BROIndia rises to restore lifelines 🇮🇳
Following a landslide on the revered #KailashMansarovarYatra route on 10 July, teams of #BROIndia Project Hirak worked… pic.twitter.com/lBL1lJ5xGR
— 𝐁𝐨𝐫𝐝𝐞𝐫 𝐑𝐨𝐚𝐝𝐬 𝐎𝐫𝐠𝐚𝐧𝐢𝐬𝐚𝐭𝐢𝐨𝐧 (@BROindia) July 12, 2026
यात्रा का आध्यात्मिक और रणनीतिक महत्व
कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए साल की सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक यात्राओं में से एक है। हर साल सैकड़ों श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा पर निकलते हैं। उत्तराखंड सरकार और BRO के लिए यह मार्ग न केवल तीर्थयात्रियों की सुविधा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत-चीन सीमा के पास होने के कारण रणनीतिक (strategic) रूप से भी अत्यधिक संवेदनशील है।
सरकार की प्रतिबद्धता
हाल ही में, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और उनके आरामदायक अनुभव को सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। BRO के इस त्वरित हस्तक्षेप से यह सुनिश्चित हुआ है कि यात्रा कार्यक्रम पर कोई दीर्घकालिक प्रभाव न पड़े और श्रद्धालु निर्बाध रूप से अपनी आस्था की यात्रा जारी रख सकें।
BRO की भूमिका: सीमा सड़क संगठन (BRO) कठिन से कठिन इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास और रखरखाव के लिए जाना जाता है। आपदा के समय इनका त्वरित बचाव कार्य अक्सर दुर्गम इलाकों में जीवन को सामान्य बनाने का एकमात्र साधन होता है।




