भारत में मानसून का दोहरा रूप: कहीं मूसलाधार बारिश, तो कहीं भीषण उमस
आईएमडी ने जारी किया अलर्ट, पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश की संभावना, जबकि दक्षिण भारत में गर्मी से लोग परेशान

14 जुलाई, नई दिल्ली: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आगामी सप्ताह के लिए देश के मौसम का जो पूर्वानुमान जारी किया है, उसमें एक स्पष्ट विरोधाभास देखने को मिल रहा है। जहाँ एक ओर देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्से भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चपेट में हैं, वहीं दक्षिण और तटीय भारत के कई राज्य भीषण गर्मी और चिपचिपी उमस (Sticky Heat) का सामना कर रहे हैं।
पूर्वोत्तर भारत: बाढ़ और जलजमाव का खतरा
IMD के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून वर्तमान में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में पूरी तरह सक्रिय है। अगले सात दिनों तक यहाँ व्यापक बारिश होने का अनुमान है।
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रेड अलर्ट: मेघालय और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों के लिए ‘अत्यधिक भारी बारिश’ की चेतावनी जारी की गई है।
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अन्य प्रभावित राज्य: असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में पूरे सप्ताह भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा, ओडिशा, झारखंड और बिहार के गंगा के मैदानी इलाकों में भी मूसलाधार बारिश के आसार हैं।
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त्रिपुरा की स्थिति: त्रिपुरा में 16 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट जारी है। अगरतला सहित कई जिलों (खोवई, पश्चिम त्रिपुरा, सिपाहीजाला, गोमती और दक्षिण त्रिपुरा) में येलो अलर्ट जारी किया गया है, जिससे निचले इलाकों में जलजमाव और स्थानीय बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
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असम के लिए चेतावनी: असम में 15 जुलाई से बारिश की तीव्रता बढ़ने की उम्मीद है, जिसमें गरज-चमक और बिजली गिरने के साथ भारी बारिश हो सकती है। IMD ने लोगों को पेड़ों या कमजोर ढांचों के नीचे शरण न लेने की सलाह दी है।
उत्तर भारत: इस सप्ताह के अंत में बारिश के आसार
मौसम विभाग ने उत्तर भारत के लिए भी एक अपडेट दिया है:
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उत्तराखंड: 15 जुलाई से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
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हिमालयी क्षेत्र: सप्ताह के अंत तक जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में भी भारी बारिश की उम्मीद है।
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उत्तर प्रदेश: पूर्वी उत्तर प्रदेश में 17 से 19 जुलाई के बीच और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 18-19 जुलाई को भारी बारिश हो सकती है।
दक्षिण भारत: गर्मी और उमस की मार
जहाँ उत्तर और पूर्व में बारिश हो रही है, वहीं दक्षिण और तटीय भारत के राज्यों में मौसम शुष्क बना हुआ है। तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और ओडिशा के कुछ हिस्सों में अगले तीन से चार दिनों तक असहज गर्म और उमस भरी स्थिति बनी रहेगी। तटीय आंध्र प्रदेश में ‘हीटवेव’ (लू) जैसी स्थिति के भी आसार जताए गए हैं।
मानसून में आया ‘ब्रेक’: उपग्रह चित्रों से खुलासा
हाल ही में ली गई INSAT-3DS उपग्रह तस्वीरों ने मानसून के इस ‘फ्लिप’ (बदलाव) को स्पष्ट कर दिया है। 30 जून की तस्वीरों में बादल मध्य और पश्चिमी भारत तक फैले थे, जबकि 13 जुलाई की तस्वीरों में ये बादल वहां से हटकर हिमालय की तलहटी और पूर्वोत्तर की ओर केंद्रित हो गए हैं। इसे मानसून का ‘क्लासिक ब्रेक’ माना जा रहा है। इसका सीधा असर खरीफ की बुवाई पर पड़ रहा है। हालांकि पिछले दो हफ्तों में मानसून की कमी में सुधार हुआ है, लेकिन 1 जून से 13 जुलाई तक देश में सामान्य से 18% कम बारिश दर्ज की गई है।
तेलंगाना की विशेष तैयारी
मानसून के पैटर्न में बदलाव और अल-नीनो (El Niño) के संभावित प्रभाव को देखते हुए तेलंगाना सरकार ने एक तीन-चरणीय आकस्मिक योजना (Contingency Plan) तैयार की है। इसका उद्देश्य फसल के नुकसान को कम करना है, ताकि सूखे की स्थिति या देर से बारिश होने पर किसानों को नुकसान न हो।




