सोनम वांगचुक का अनशन: कोर्ट ने सरकार को दी कड़ी चेतावनी, कहा- ‘हर जीवन अनमोल’
अदालत ने कहा— "हर नागरिक का जीवन अनमोल है, सरकार करे हर संभव प्रयास"; नीट परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर 25 दिनों से जारी है विरोध प्रदर्शन

नई दिल्ली | 16 जुलाई, 2026: दिल्ली उच्च न्यायालय ने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और मानवीय निर्देश जारी किया है। अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि वे वांगचुक के स्वास्थ्य की दैनिक आधार पर गहन निगरानी करें और उनकी स्थिति बिगड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करें।

“हर नागरिक का जीवन अनमोल”
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए टिप्पणी की कि “हर नागरिक का जीवन अनमोल है और सरकार का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह एक नागरिक के जीवन को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करे।”
अदालत ने सरकारी डॉक्टरों को निर्देश दिया है कि वे नियमित रूप से वांगचुक के स्वास्थ्य का परीक्षण करें। इसके अलावा, अदालत ने यह भी कहा है कि यदि डॉक्टरों की टीम को आवश्यक लगता है, तो बिना किसी देरी के चिकित्सा हस्तक्षेप (Medical Intervention) किया जाना चाहिए।
सोनम वांगचुक का आंदोलन
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वे नीट (NEET) परीक्षा में हुई कथित धांधली को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में यह आंदोलन पिछले 25 दिनों से जारी है, जिसमें वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

क्या है वर्तमान स्थिति?
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया था कि लंबे समय से जारी अनशन के कारण वांगचुक के स्वास्थ्य में भारी गिरावट दर्ज की गई है और उनका वजन भी काफी कम हो गया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वासन दिया कि सरकार उनकी स्थिति को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है और नियमित रूप से उनके स्वास्थ्य मापदंडों की जांच की जा रही है।
अदालत ने इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए सरकार को स्वास्थ्य निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
स्रोत: PTI (Press Trust of India)




