वाराणसी: बीएचयू ने राजघाट से मिले प्राचीन मानव कंकाल पर शुरू किया पहला जेनेटिक और बायो-आर्कियोलॉजिकल अध्ययन
गंगा घाटी के शुरुआती निवासियों के इतिहास, खान-पान और सिंधु घाटी सभ्यता के साथ उनके आनुवंशिक संबंधों की होगी जांच

5 अगस्त, वाराणसी: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) ने इतिहास और पुरातत्व के क्षेत्र में एक बड़ी पहल करते हुए वाराणसी के प्राचीन राजघाट स्थल से खुदाई में मिले एक मानव कंकाल पर अपनी तरह का पहला अंतरविषयक (Interdisciplinary) जेनेटिक और बायो-आर्कियोलॉजिकल अध्ययन शुरू किया है।

इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य गंगा घाटी के शुरुआती निवासियों के वंशानुक्रम (Ancestry), खान-पान (Diet), स्वास्थ्य और उनकी जीवनशैली के बारे में अहम जानकारियां हासिल करना है।
सिंधु घाटी और राखीगढ़ी से संबंधों की होगी जांच
वैज्ञानिक और शोधकर्ता इस अध्ययन के जरिए यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या गंगा घाटी के इन प्राचीन निवासियों का सिंधु घाटी सभ्यता (IVC), विशेषकर राखीगढ़ी के लोगों के साथ कोई आनुवंशिक या सांस्कृतिक संबंध था।

अध्ययन के प्रमुख बिंदु:
-
आनुवंशिक और शारीरिक विश्लेषण: कंकाल के डीएनए और बायो-आर्कियोलॉजिकल नमूनों की जांच से प्राचीन काल के मानव जीवन की सटीक जानकारी मिलेगी।
-
प्राचीन आहार और स्वास्थ्य: इस अध्ययन से यह स्पष्ट हो सकेगा कि उस दौर के लोगों का भोजन क्या था, वे किस तरह की बीमारियों से पीड़ित थे और उनका जीवन स्तर कैसा था।
-
इतिहास की नई परतें: गंगा घाटी में मानव सभ्यता के विकास और सिंधु घाटी सभ्यता के साथ उनके जुड़ाव को समझने की दिशा में यह शोध एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

बीएचयू की यह पहल भारतीय उपमहाद्वीप के प्राचीन इतिहास और मानव विकास के रहस्यों से पर्दा उठाने में काफी मददगार साबित होगी।




