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लोन रिकवरी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: एजेंटों की गुंडागर्दी पर रोक, फाइनेंस कंपनी पर 10 लाख का जुर्माना

कर्ज की वसूली के नाम पर कानून हाथ में नहीं ले सकते बैंक और रिकवरी एजेंट, सर्वोच्च अदालत ने दिया कड़ा संदेश

नई दिल्ली, 28 सितंबर 2026: लोन रिकवरी के नाम पर रिकवरी एजेंटों की गुंडागर्दी और मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया है कि भले ही किसी देनदार (बकायादार) की किश्तें बाकी हों, लेकिन बैंकों या वित्तीय संस्थानों को कानून अपने हाथ में लेने या बल प्रयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

रात 1 बजे तोड़ा वाहन का लॉक

यह मामला Hari Dutta Sharma बनाम State of U.P. & Ors. से जुड़ा हुआ है। पीड़ित ने अपनी आजीविका कमाने के लिए एक Tata SFC 407 ट्रक खरीदा था, जिसके लिए उसने चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी से लोन लिया था। लोन की किश्तें बकाया होने पर 9 अप्रैल 2023 की देर रात करीब 1 बजे रिकवरी एजेंट पहुंचे। उन्होंने बिना किसी पूर्व सूचना या कानूनी प्रक्रिया का पालन किए वाहन के स्टीयरिंग का लॉक तोड़ा और उसे जबरन उठाकर ले गए। बाद में इस वाहन की नीलामी भी कर दी गई।

हाईकोर्ट से निराशा के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

पीड़ित ने अपनी आजीविका के साधन को बचाने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन वहां से राहत न मिलने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

अदालत का बड़ा फैसला और मुआवजा

मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोन रिकवरी का अधिकार किसी भी बैंक या संस्था को कानून से ऊपर नहीं बनाता। रिकवरी की प्रक्रिया कानूनी दायरे, अनुबंध की शर्तों और आरबीआई/नियामकीय दिशा-निर्देशों के तहत ही होनी चाहिए।

कोर्ट ने फाइनेंस कंपनी पर सख्त कदम उठाते हुए निर्देश जारी किए:

  • ₹10 लाख का मुआवजा: मानसिक प्रताड़ना और अवैध जब्ती के लिए कंपनी पीड़ित को ₹10 लाख का मुआवजा देगी।

  • बिक्री राशि की वापसी: वाहन की नीलामी से प्राप्त ₹4.50 लाख की राशि 6 प्रतिशत ब्याज के साथ पीड़ित को लौटानी होगी।

  • खाते बंद करने का आदेश: पीड़ित से जुड़े दोनों लोन खातों को तुरंत प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया गया।

कर्जदारों के लिए जरूरी सलाह NCIB Headquarters के अनुसार, यदि किसी वाहन मालिक के साथ रिकवरी एजेंट धमकी, अभद्रता या जबरन जब्ती करते हैं, तो पीड़ित को डरने के बजाय संबंधित दस्तावेजों के आधार पर कानूनी और नियामकीय मंच पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। अपने लोन एग्रीमेंट, नोटिस और किश्तों की रसीदें हमेशा सुरक्षित रखें।

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