तीन-भाषा नीति: सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और CBSE को निर्देश, छठी कक्षा के छात्रों को भी मिले छूट
शीर्ष अदालत ने कहा—कक्षा 7, 8 और 9 की तरह कक्षा 6 के विद्यार्थियों को भी राहत देने पर विचार करे केंद्र; अगले सत्र से लागू करने का सुझाव

नई दिल्ली, 29 सितंबर 2026: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को निर्देश दिया है कि चालू शैक्षणिक सत्र के दौरान छठी कक्षा (Class 6) के छात्रों को भी तीन-भाषा नीति (Three-Language Policy) के अनिवार्य कार्यान्वयन से राहत देने पर विचार किया जाए। शीर्ष अदालत ने कहा कि जिस तरह कक्षा 7, 8 और 9 के विद्यार्थियों को छूट दी गई है, वही राहत इस साल कक्षा 6 के छात्रों को भी प्रदान की जानी चाहिए।
प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागछी और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से इस संबंध में सकारात्मक कदम उठाने को कहा। पीठ ने सुझाव दिया कि वर्तमान सत्र में कक्षा 6 के लिए इस नीति को स्थगित रखकर अगले शैक्षणिक सत्र (2027) से लागू किया जा सकता है, जिससे स्कूलों को आवश्यक ढांचागत व्यवस्था बनाने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखते हुए कहा कि लगभग 99 प्रतिशत CBSE संबद्ध स्कूलों ने इस नीति को अपना लिया है और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा दी हैं। केवल 1.2 प्रतिशत (लगभग 300) स्कूलों को ही क्रियान्वयन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, अदालत ने माना कि बीच सत्र में अचानक बदलाव से बच्चों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव पड़ता है।
क्या है मामला?
यह विवाद CBSE द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCFSE) 2023 के तहत लागू किए गए भाषा नियम से जुड़ा है। इसके तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना आवश्यक है। अभिभावकों और याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि शिक्षकों की कमी और अध्ययन सामग्री की अनुपलब्धता के कारण छात्रों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।




