
चंडीगढ़, 18 जून 2026: देश की वर्तमान शिक्षा प्रणाली में व्याप्त विसंगतियों और युवाओं के भविष्य को लेकर मचे संशय के बीच, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव और सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा प्रणाली में तत्काल सुधार नहीं किए गए, तो इसका दूरगामी और नकारात्मक असर देश की भावी पीढ़ी पर पड़ेगा।

प्रमुख बिंदु और सैलजा के तर्क:
1. प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर संकट
कुमारी सैलजा ने कहा कि नीट (NEET) जैसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षाओं की निष्पक्षता पर उठते सवाल अत्यंत गंभीर हैं। उन्होंने कहा, “जब एक छात्र अपनी मेहनत और सपनों को दांव पर लगाकर वर्षों तैयारी करता है, और अंत में उसे प्रशासनिक खामियों, पेपर लीक और भ्रष्टाचार का शिकार होना पड़ता है, तो उसका व्यवस्था से भरोसा उठ जाता है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है।

2. राहुल गांधी के प्रयासों का समर्थन
सांसद ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा युवाओं के मुद्दों को मुखर होकर उठाने के अभियान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश के करोड़ों छात्रों की आवाज बने हुए हैं। वे लगातार यह प्रश्न पूछ रहे हैं कि हमारी शिक्षा व्यवस्था क्यों युवाओं की प्रतिभा को संवारने के बजाय उन्हें सीमित करियर विकल्पों के जाल में उलझा रही है।
3. पारंपरिक शिक्षा से आगे बढ़ने की जरूरत
कुमारी सैलजा के अनुसार, शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि युवाओं का सर्वांगीण विकास करना है। कांग्रेस की मांग है कि शिक्षा प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन हो, ताकि युवाओं को:
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नवाचार (Innovation) और उद्यमिता (Entrepreneurship) के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
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कला, खेल, अनुसंधान (Research) और अन्य उभरते क्षेत्रों में समान अवसर प्राप्त हों।
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उनकी व्यक्तिगत रुचि और क्षमता को पहचानकर उन्हें उस दिशा में बढ़ने के संसाधन मिलें।
4. सरकार की विफलता और जवाबदेही
कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर ‘उदासीनता’ बरत रही है। उन्होंने कहा कि रोजगार के अवसरों की कमी और शिक्षा की गिरती गुणवत्ता सरकार की विफलताओं को दर्शाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी छात्रों के अधिकारों के लिए सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष जारी रखेगी।
छात्रों और अभिभावकों से अपील
अपने संबोधन के अंत में, कुमारी सैलजा ने एक सामाजिक आह्वान किया। उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और देश के प्रबुद्ध शिक्षाविदों से आग्रह किया कि वे शिक्षा व्यवस्था को ‘पारदर्शी, जवाबदेह और छात्र-हितैषी’ बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करें। उन्होंने कहा, “युवा देश का भविष्य हैं, और इनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।




