
चंडीगढ़, 22 जून: इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के प्रधान महासचिव और पूर्व विधायक चौधरी अभय सिंह चौटाला ने हरियाणा की भाजपा सरकार पर बाढ़ नियंत्रण के नाम पर जनता के पैसे की खुली लूट करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हर साल फ्लड कंट्रोल के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट पास किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं होता। अभय चौटाला ने कांग्रेस और भाजपा दोनों के शासनकाल में बाढ़ नियंत्रण पर खर्च की गई राशि की विधानसभा की विशेष कमेटी द्वारा जांच कराने की मांग की है।

“कागजों तक सीमित है भाजपा का फ्लड मैनेजमेंट”
अभय सिंह चौटाला ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि आगामी मानसून और बारिश आने में अब महज कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन सरकार की लापरवाही के कारण प्रदेश में बाढ़ आपदा से निपटने के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि:
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अधूरे कार्य: राज्य में ड्रेनेज (नालों) की सफाई नहीं हुई है, तटबंध बेहद कमजोर हैं और पानी निकासी के रास्ते बंद पड़े हैं।
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करोड़ों का बजट गायब: इस साल भी फ्लड कंट्रोल बोर्ड की बैठक में 388 प्रोजेक्टों के लिए 640 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। मंत्री, अधिकारी और ठेकेदार आपस में मिलीभगत कर इस राशि को सिर्फ कागजों में दिखाकर डकार रहे हैं।
पिछले साल की तबाही और ‘टैक्टर फोटोशूट’ पर तंज
पिछले साल आई बाढ़ का जिक्र करते हुए इनेलो नेता ने कहा कि सरकार की नाकामी के कारण लोगों के घर उजड़ गए थे, फसलें तबाह हो गईं और भारी संख्या में पशुओं की मौत हुई थी। कई इलाकों में तो भूख-प्यास से जान जाने की नौबत आ गई थी।
“बाढ़ पीड़ितों की मदद करने की बजाय मुख्यमंत्री, उनके मंत्री और भाजपा के नेता ट्रैक्टरों पर चढ़कर बेशर्मी से फोटो सेशन कराने में व्यस्त थे। भाजपा के लिए जनता की मुसीबत भी केवल वोट बैंक और पब्लिसिटी का एक जरिया है।” — अभय सिंह चौटाला
इनेलो की प्रमुख मांगें
चौधरी अभय सिंह चौटाला ने सरकार को चेतावनी देते हुए निम्नलिखित मांगें उठाई हैं:
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विधानसभा कमेटी द्वारा जांच: कांग्रेस और भाजपा दोनों सरकारों के कार्यकाल के दौरान बाढ़ नियंत्रण के नाम पर खर्च हुए हजारों करोड़ रुपये के घोटालों की जांच के लिए तुरंत विधानसभा की एक विशेष समिति का गठन किया जाए।
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दोषियों पर सख्त कार्रवाई: भ्रष्टाचार में लिप्त मंत्रियों, अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो और जनता के बर्बाद हुए पैसे की उनसे वसूली की जाए।
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अधूरे काम तुरंत हों पूरे: मानसून की पहली बारिश से पहले सभी अधूरे ड्रेनेज, जल निकासी और तटबंधों को दुरुस्त करने का काम युद्ध स्तर पर पूरा किया जाए।

उन्होंने साफ तौर पर कहा कि प्रदेश की जनता अब केवल खोखले वादे और फोटोशूट नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस काम और जवाबदेही चाहती है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए और आने वाले दिनों में बाढ़ से कोई तबाही होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी मौजूदा भाजपा सरकार की होगी।




