
चंडीगढ़, 17 जून 2026: हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने राज्य में मानसून से पहले ही मंडरा रहे बाढ़ के खतरे को लेकर हरियाणा सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सरकार की तैयारियों को नाकाफी बताते हुए इसे एक बड़ी प्रशासनिक विफलता करार दिया है।

प्रमुख बिंदु:
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बढ़ता जलस्तर: भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के आंकड़ों का हवाला देते हुए दुष्यंत चौटाला ने बताया कि भाखड़ा डैम का जलस्तर सामान्य (1543 फुट) से 35 फुट ऊपर उठकर 1578 फुट तक पहुंच गया है। यह पिछले वर्षों की तुलना में 20 फुट अधिक है।
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ग्लेशियर पिघलने का असर: भीषण गर्मी के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे गोबिंद सागर झील में लगभग 3 लाख करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी जमा हो चुका है।
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सरकार पर सवाल: चौटाला ने आरोप लगाया कि पिछली बाढ़ से सबक न लेते हुए सरकार अब भी गहरी नींद में है। मानसून के आने पर इस अतिरिक्त पानी को सहेजने के लिए सरकार के पास कोई ठोस विजन नहीं है।
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तत्काल मांग: उन्होंने सरकार से मांग की है कि:
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पंजाब सरकार और बीबीएमबी के साथ तुरंत आपातकालीन बैठक बुलाई जाए।
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अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से निकालकर सूखे इलाकों और नहरों की ओर मोड़ा जाए।
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बाढ़ के पानी को सीधे भूजल रिचार्ज (Groundwater Recharge) करने के लिए सिस्टम तैयार किया जाए।
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दुष्यंत चौटाला ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो इस बार भी किसानों की फसलें और सैकड़ों गांव जलमग्न होने की कगार पर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी हरियाणा सरकार की होगी।




