RegionalStatesViral

भारत का सबसे पुराना कैदी: जिसने जेल की दीवारों के बीच बिता दी पूरी जिंदगी

37 साल की कैद, तीन हत्याएं और एक रिहाई—आखिर अब क्या?

6 जुलाई, बेंगलुरु: 72 वर्षीय सैबन्ना एन. नातिकर ने हाल ही में बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा केंद्रीय जेल से बाहर कदम रखा, तो वे लगभग चार दशकों की कैद के बाद खुली हवा में सांस ले रहे थे। सैबन्ना को भारत के सबसे लंबे समय तक जेल में रहने वाले कैदी के रूप में जाना जाता है।

दशकों लंबी कैद का अंत

सैबन्ना, जिनके लंबे ग्रे बाल और दाढ़ी उनके बीते हुए कठिन समय की गवाही देते हैं, जेल से रिहाई के बाद एक स्वतंत्र व्यक्ति हैं। जेल के अधिकारियों के अनुसार, उनका जेल के भीतर का आचरण बहुत अच्छा था। डीजीपी (जेल) आलोक कुमार ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने सैबन्ना से बेलगावी और कलबुर्गी जेल में भी बातचीत की थी और उनका व्यवहार हमेशा सराहनीय रहा।

अपराध और कानूनी सफर

सैबन्ना का जीवन दुखों और विवादों से भरा रहा है:

  • पहला अपराध (1988): सैबन्ना को अपनी पहली पत्नी, मलाव्वा की हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया था, जिसे उन्होंने बेवफाई के शक में मार डाला था। उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

  • पैरोल और फिर हिंसा: 1994 में पैरोल पर बाहर आने के बाद, उन्होंने दूसरी शादी की और उनका एक परिवार बना। लेकिन जल्द ही उनके जीवन में फिर से हिंसा ने जगह ले ली। उन्होंने अपनी दूसरी पत्नी नागम्मा और उनकी छोटी बेटी विजयलक्ष्मी की भी हत्या कर दी, जिसके पीछे भी उन्होंने बेवफाई का ही आरोप लगाया था।

  • कानूनी प्रक्रिया: शुरुआती दौर में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में आजीवन कारावास में बदल दिया गया था।

उनकी रिहाई कानूनी हस्तक्षेप के बाद हुई, जिसमें अवैध एकांत कारावास और दया याचिकाओं में देरी जैसे पहलुओं को उठाया गया था। उनकी रिहाई ने एक बार फिर कैदियों के अधिकार और अपराध की गंभीरता के बीच के विवाद को चर्चा में ला दिया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button