Video: कनकापुरा: रेलवे बैरिकेड में फंसा जंगली हाथी, वन विभाग की टीम ने 5 घंटे की मशक्कत के बाद बचाई जान
कावेरी वन्यजीव अभयारण्य के पास भोजन की तलाश में निकला था हाथी; गैस कटर से लोहे के खंभे काटकर निकाला गया सुरक्षित

बेंगलुरु: कर्नाटक के रामनगर जिले के कनकापुरा तालुक में एक जंगली हाथी की जान पर उस समय बन आई, जब वह जंगल के रास्ते में लगे रेलवे बैरिकेड के बीच बुरी तरह फंस गया। यह घटना बुधवार सुबह अरेकोप्पा गांव के पास हुई, जहाँ भोजन की तलाश में जंगल से बाहर निकला एक नर हाथी वापस लौटते समय धातु के खंभों के बीच फंस गया।
कैसे हुई घटना?
वन अधिकारियों के अनुसार, यह लगभग 22 वर्षीय नर हाथी कावेरी वन्यजीव अभयारण्य (Cauvery Wildlife Sanctuary) के मुगुर रेंज से निकलकर रात में कृषि क्षेत्रों की ओर आ गया था। सुबह जब वह वापस अपने प्राकृतिक आवास में जाने का प्रयास कर रहा था, तो उसने रेलवे बैरिकेड में बने एक संकरे रास्ते से निकलने की कोशिश की। दुर्भाग्यवश, यह रास्ता हाथी के आकार की तुलना में काफी छोटा था और उसका आधा शरीर बैरिकेड के लोहे के खंभों के बीच फंस गया।

5 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन
हाथी के फंसने की सूचना सुबह करीब 6:45 बजे स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही कावेरी वन्यजीव अभयारण्य के उप वन संरक्षक (DCF) एन.एच. जगन्नाथ के नेतृत्व में वन अधिकारियों, पशु चिकित्सकों और बचाव दल की टीम मौके पर पहुंची।
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बचाव प्रक्रिया: हाथी के काफी थक जाने और दर्द से कराहने के बाद, पशु चिकित्सकों डॉ. किरण और डॉ. गिरीश की देखरेख में उसे पहले ट्रेंक्विलाइज़र (बेहोश करने वाली दवा) दी गई।
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सुरक्षित निकासी: बेहोश होने के बाद, गैस कटर की मदद से लोहे के बैरिकेड को काटकर रास्ता बनाया गया। लगभग 5 घंटे के संघर्ष के बाद, अधिकारियों ने हाथी को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की।
हाथी पूरी तरह स्वस्थ
अधिकारियों ने बताया कि हाथी को बाहर निकालने के बाद उसे विटामिन और हाइड्रेशन सप्लीमेंट दिए गए, ताकि उसकी रिकवरी तेज हो सके। राहत की बात यह रही कि घंटों तक फंसे रहने के बावजूद हाथी को कोई गंभीर चोट नहीं आई। होश में आने और पूरी तरह रिकवर होने के बाद उसे वापस जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
बैरिकेड्स पर फिर छिड़ी बहस
इस घटना ने एक बार फिर वन्यजीवों के लिए लगाए गए रेलवे बैरिकेड्स की उपयोगिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि वन विभाग का तर्क है कि ये बैरिकेड्स फसलों को हाथियों द्वारा बर्बाद करने और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए जरूरी हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ये अवरोध कभी-कभी जानवरों के लिए ही जानलेवा साबित हो रहे हैं।




