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पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में 93% से अधिक की भारी गिरावट, 2026 में अब तक सामने आए मात्र 474 मामले

Punjab News: पंजाब में भगवंत मान सरकार की सब्सिडी नीतियों और आधुनिक मशीनों की बदौलत पराली जलाने की घटनाओं में 93% की रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है।

24 अक्तूबर 2026, चंडीगढ़: हर साल सर्दियां शुरू होते ही दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण और पराली जलाने के मुद्दे पर पंजाब की चर्चा तेज हो जाती है। लेकिन हालिया सरकारी आंकड़े एक बिल्कुल बदलती तस्वीर पेश कर रहे हैं। टाइम्स नाउ नवभारत की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में पिछले कुछ वर्षों में पराली जलाने की घटनाओं में ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है। राज्य सरकार की प्रभावी नीतियों और किसानों के सहयोग से इस साल मामलों में 93% से ज्यादा की गिरावट आई है।

आंकड़ों में आई बड़ी गिरावट

पंजाब कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:

  • वर्ष 2022: पराली जलाने की कुल 49,922 घटनाएं दर्ज हुई थीं।

  • वर्ष 2025: यह आंकड़ा घटकर महज 5,114 पर आ गया।

  • वर्ष 2026: अब तक केवल 474 मामले ही सामने आए हैं।

यह गिरावट इस बात का प्रमाण है कि पराली प्रबंधन की दिशा में किए जा रहे प्रयास धरातल पर असर दिखा रहे हैं।

सरकार की सब्सिडी नीतियां और आधुनिक मशीनरी

इस बड़े बदलाव के पीछे भगवंत मान सरकार की वह नीति है जिसमें किसानों को केवल जुर्माने या कानूनी कार्रवाई से डराने के बजाय खेतों में काम आने वाले व्यावहारिक साधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

  • भारी सब्सिडी: सरकार व्यक्तिगत किसानों को कृषि मशीनों पर 50% से अधिक और कस्टम हायरिंग सेंटर्स, FPO, सहकारी समितियों व पंचायतों को 80% तक सब्सिडी दे रही है।

  • मशीनों की खरीद: साल 2026 के सीजन में किसानों ने 21,155 फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनें खरीदी हैं। इसमें 14,384 सुपर सीडर, 1,721 मल्चर, 1,346 हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, 1,123 जीरो टिल ड्रिल, 927 बेलिंग मशीनें और 874 स्ट्रॉ रेक शामिल हैं।

  • बजट योजना: पंजाब सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 600 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की है, जिससे किसानों को तकनीकी सहायता और आधुनिक उपकरण आसानी से मिल सकें।

पराली से अतिरिक्त आमदनी का जरिया

अब किसान पराली को केवल मजबूरी मानकर जलाने के बजाय आय का स्रोत भी बना रहे हैं। कई किसान पराली को इकट्ठा कर बायोगैस और बायो-CNG परियोजनाओं के लिए बेच रहे हैं। उदाहरण के लिए, संगरूर के एक किसान ने लगभग 12 हजार क्विंटल पराली बेचकर करीब 16 लाख रुपये की कमाई की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रुख जारी रहा, तो आने वाले समय में पराली जलाने की समस्या से पूरी तरह निजात मिल जाएगी और इससे सर्दियों में उत्तर भारत के प्रदूषण स्तर में भी भारी सुधार देखने को मिलेगा।

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