हर लापता व्यक्ति के मामले में तुरंत दर्ज हो FIR: सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश, उम्र या लिंग का कोई भेद नहीं

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11 अगस्त 2026, नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि किसी भी व्यक्ति के गायब या लापता होने की स्थिति में पुलिस को तुरंत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करनी होगी। अदालत ने साफ किया कि यह नियम हर नागरिक पर लागू होता है—चाहे उसकी उम्र या लिंग कुछ भी हो।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने सुनवाई के दौरान नाराजगी जताते हुए कहा कि कुछ राज्यों द्वारा यह गलतफहमी फैलाई जा रही थी कि अदालत का आदेश केवल लापता बच्चों के मामलों तक ही सीमित है। पीठ ने इस तरह की व्याख्या को जानबूझकर और गलत नीयत से खड़ा किया गया बहाना करार दिया।
अवमानना नोटिस और अधिकारियों की पेशी
अदालत ने निर्देश दिया कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने 22 मई के आदेश का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया है, उनके मुख्य सचिवों (Chief Secretaries) और पुलिस महानिदेशकों (DGPs) को अवमानना का नोटिस जारी किया जाए। संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष उपस्थित होकर यह स्पष्टीकरण देना होगा कि आदेश की अवहेलना के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
शुरुआती जांच का इंतजार किए बिना हो कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने पुनः स्पष्ट किया कि किसी भी पुलिस स्टेशन को लापता व्यक्ति की सूचना मिलते ही बिना किसी प्राथमिक जांच (Preliminary Inquiry) का इंतजार किए तुरंत FIR दर्ज करनी होगी। इसके साथ ही, FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मानव तस्करी या अपहरण से संबंधित प्रासंगिक धाराओं को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को तय की गई है।
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