वाराणसी में हवा में उड़ेगी ‘केबल कार’: देश का पहला अर्बन रोपवे तैयार, 45 मिनट का सफर सिर्फ 16 मिनट में
815 करोड़ की लागत और स्विस टेक्नोलॉजी से लैस इस प्रोजेक्ट से काशी आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को मिलेगी जाम से भारी राहत

वाराणसी: महादेव की नगरी काशी में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को जल्द ही ट्रैफिक जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलने वाली है। वाराणसी में बन रहा देश का पहला और दुनिया का तीसरा अर्बन पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे (Urban Public Transport Ropeway) अब लॉन्च के लिए पूरी तरह तैयार है।

इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जिससे अब बनारस की तंग गलियों और सड़कों पर लगने वाले भारी जाम के बीच सफर करने का अंदाज पूरी तरह बदलने वाला है।

815 करोड़ की लागत और स्विस टेक्नोलॉजी का कमाल
करीब 815 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार यह प्रोजेक्ट भारत में पब्लिक ट्रांसपोर्ट क्रांति की एक नई मिसाल बनने जा रहा है। नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) द्वारा विकसित किए जा रहे इस रोपवे प्रोजेक्ट में आधुनिक स्विस टेक्नोलॉजी (Swiss Technology) का इस्तेमाल किया गया है।
बोलिविया के ला पाज़ और मैक्सिको के बाद भारत दुनिया का ऐसा तीसरा देश बनने जा रहा है, जिसने शहरी परिवहन के लिए रोपवे का इस्तेमाल किया है।

क्या होगा रूट और स्टेशन्स?
यह रोपवे कॉरिडोर वाराणसी के सबसे व्यस्त इलाकों को आपस में जोड़ेगा। कुल 3.8 किलोमीटर लंबे इस रूट पर 5 बेहद आधुनिक स्टेशन्स बनाए गए हैं:
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वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन (शुरुआती स्टेशन)
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काशी विद्यापीठ
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रथयात्रा
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गिरजाघर
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गोदौलिया चौक (अंतिम स्टेशन)
सबसे बड़ा फायदा: वर्तमान में वाराणसी कैंट स्टेशन से गोदौलिया चौक तक जाने में सड़क मार्ग से करीब 45 से 50 मिनट का समय लगता है। लेकिन रोपवे शुरू होने के बाद यात्री यह दूरी सिर्फ 16 मिनट में तय कर सकेंगे।
[वाराणसी कैंट] ──► [काशी विद्यापीठ] ──► [रथयात्रा] ──► [गिरजाघर] ──► [गोदौलिया चौक]
└─────────────────── सिर्फ 16 मिनट का सफर ───────────────────┘
शानदार कैपेसिटी: हर दिन 1 लाख यात्री करेंगे सफर
इस पूरे कॉरिडोर में कुल 148 आलीशान गंडोला (केबल कार/केबिन) हवा में दौड़ते नजर आएंगे।
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सिटिंग कैपेसिटी: प्रत्येक केबिन में 10 यात्रियों के बैठने की आरामदायक व्यवस्था होगी।
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फ्रीक्वेंसी: यात्रियों को स्टेशन पर ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि हर 2 से 3 मिनट के अंतराल पर एक केबिन उपलब्ध रहेगा।
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दैनिक क्षमता: इस सिस्टम की मदद से रोजाना लगभग 1 लाख से अधिक लोग बेहद सुगमता और आराम से सफर कर सकेंगे।

सुरक्षा के विश्वस्तरीय मानक और ईको-फ्रेंडली सफर
चूंकि यह भारत में अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट है, इसलिए सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं किया गया है।
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3-लेवल रेस्क्यू सिस्टम: किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए इसमें अत्याधुनिक रेस्क्यू मैकेनिज्म दिया गया है।
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विंड सेंसर्स: तेज हवाओं या मौसम खराब होने की स्थिति में सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए एडवांस विंड सेंसर्स लगाए गए हैं।
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24/7 मॉनिटरिंग: पूरे रूट और केबिन्स की चौबीसों घंटे सीसीटीवी (CCTV) के जरिए सेंट्रल कंट्रोल रूम से निगरानी की जाएगी।
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प्रदूषण मुक्त: यह पूरी तरह से एक ‘ग्रीन और ईको-फ्रेंडली’ ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जो वाराणसी में कार्बन फुटप्रिंट और वायु प्रदूषण को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा।
काशी के पर्यटन को लगेंगे पंख
काशी विश्वनाथ मंदिर और दशाश्वमेध घाट जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए गोदौलिया मुख्य केंद्र माना जाता है। रोपवे शुरू होने के बाद ट्रेन से बनारस पहुंचने वाले तीर्थयात्री सीधे कैंट स्टेशन से केबल कार पकड़कर बिना किसी ट्रैफिक के गोदौलिया पहुंच सकेंगे। इससे न केवल स्थानीय लोगों को सहूलियत होगी, बल्कि बनारस के पर्यटन को भी एक नई ऊंचाई मिलेगी।
प्राचीन संस्कृति और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का यह बेहतरीन मेल अब बहुत जल्द लाइव होने जा रहा है, जो ‘न्यू इंडिया’ के बदलते स्वरूप की गवाही दे रहा है।




