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ईरान से पीस डील फाइनल, अब इन देशों से जंग लड़ने की तैयारी में अमेरिका

ईरान के साथ समझौते के बाद अब अमेरिका की तैयारी इन तीन देशों से युद्ध लड़ने की बताई जा रही है. कहा जा रहा है कि पेंटागन ने इसको लेकर प्लान भी तैयार कर लिया है. जिन देशों के साथ अमेरिका के संभावित संघर्ष की चर्चा हो रही है, उनमें क्यूबा, कोलंबिया और पेरू शामिल हैं. ये तीनों देश अमेरिका के कट्टर विरोधी माने जाते हैं. क्यूबा को लेकर अमेरिका पहले भी खुलकर चेतावनी दे चुका है.

आजादी के बाद से अब तक अमेरिका छोटे-बड़े लगभग 400 युद्धों और सैन्य अभियानों में शामिल रहा है. उसके इतिहास में अब तक केवल 13 वर्ष ऐसे रहे हैं, जब वह किसी न किसी सैन्य संघर्ष या युद्ध में शामिल नहीं था.

1. क्यूबा- कम्युनिष्ट सरकार वाली क्यूबा अमेरिका की रडार पर है. यहां के राष्ट्रपति पर अमेरिका ने इनाम घोषित किया है. अमेरिका क्यूबा के आसपास अपने जहाजों की बाड़ेबंदी की है. 10 जून को अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक बयान में कहा- पेंटागन क्यूबा से जुड़े किसी भी संभावित परिस्थिति के लिए तैयार है.

इसी महीने की शुरुआत में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबा को फेल्ड स्टेट बताया. रुबियो के मुताबिक वर्तमान सरकार क्यूबा को नहीं सुधार सकती है. दरअसल, लंबे वक्त से क्यूबा के कम्युनिष्ट अमेरिका की मुसीबत बढ़ा रहे हैं.

2. कोलंबिया- जनवरी 2026 में कोलंबिया पर सैन्य कार्रवाई की बात अमेरिका के राष्ट्रपति ने कही थी, लेकिन इसके बाद मामला शांत हो गया. अब कोलंबिया पर ट्रंप की फिर से नजर है. कोलंबिया दक्षिणी अमेरिकी देश है, जिसे अमेरिका का विरोधी माना जाता है. कोलंबिया के राष्ट्रपति के खिलाफ अमेरिका के राष्ट्रपति कई मौकों पर तल्ख टिप्पणी कर चुके हैं.

3. पेरू- अमेरिका और पेरू के बीच पहले संबंध बेहतरीन थे, लेकिन यहां पर कम्युनिष्टों के बढ़ते प्रभाव ने वाशिंगटन की चिंता बढ़ा दी है. हाल ही में पेरू चुनाव के दौरान ट्रंप ने वहां की जनता को सीधी चेतावनी दी थी. ट्रंप ने कहा था कि यहां पर कम्युनिष्टों की सरकार नहीं आनी चाहिए. इसके बावजूद पेरू में कम्युनिष्ट नेता जीतने में कामयाब होते दिख रहे हैं.

चीन, रूस, उत्तर कोरिया जैसे देशों को अमेरिका का धुर-विरोधी माना जाता है. इसके अलावा वेनेजुएला, कोलंबिया, मेक्सिको, पेरू, ब्राजील भी अमेरिका का दुश्मन देश है. इन देशों के पास परमाणु हथियार नहीं हैं. ऐसे में इन देशों पर हमेशा से अमेरिकी हमले का खतरा मंडराता रहता है. ईरान मामले में अमेरिका ने बिना बताए तेहरान पर हमला कर दिया था.

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