Haryana

हरियाणा में 58 वर्ष की आयु पूरी करने वाले दिव्यांग कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति: वित्त विभाग ने जारी किए आदेश

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों के अनुपालन में सरकार ने जारी किए निर्देश; 3 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगे संशोधित नियम

पंचकूला: हरियाणा सरकार ने राज्य में कार्यरत दिव्यांग सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु को लेकर एक बड़ा और स्पष्ट नीतिगत निर्णय लागू किया है। वित्त विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और उपायुक्तों को निर्देश जारी कर स्पष्ट किया है कि 58 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके दिव्यांग कर्मचारी अब सेवा में बने रहने का दावा नहीं कर सकते।

आदेश के मुख्य बिंदु

वित्त विभाग द्वारा जारी हालिया निर्देशों के अनुसार:

  • तत्काल प्रभाव से कार्रवाई: 58 वर्ष की आयु पूरी कर चुके दिव्यांग कर्मचारियों को तुरंत प्रभाव से सेवानिवृत्त किया जाए।

  • संशोधित सेवा नियम: यह निर्णय 3 फरवरी 2026 से लागू संशोधित सेवा नियमों के अनुरूप है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों के दायरे में आने वाला कोई भी कर्मचारी सेवानिवृत्ति आयु के बाद सेवा विस्तार का अधिकार नहीं रखता।

  • न्यायिक निर्णयों का अनुपालन: यह आदेश सुप्रीम कोर्ट और पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा हाल ही में दिए गए फैसलों के अनुपालन में जारी किए गए हैं।

कानूनी स्थिति और अदालती फैसले

सरकार ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण न्यायिक नजीरों का हवाला दिया है:

  • सुप्रीम कोर्ट (14 अक्टूबर 2025): माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सेवानिवृत्ति की निर्धारित आयु पार करने के बाद किसी भी कर्मचारी को अंतरिम आदेशों के आधार पर सेवा में बनाए रखना न केवल सार्वजनिक नीति के विरुद्ध है, बल्कि कानून के स्थापित सिद्धांतों के भी विपरीत है।

  • पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट: हाईकोर्ट ने 17 फरवरी 2026 और 10 मार्च 2026 को दिए गए अपने फैसलों में हरियाणा सरकार द्वारा 3 फरवरी 2026 को किए गए सेवा नियमों में संशोधन को पूरी तरह वैध ठहराया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 58 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद दिव्यांग कर्मचारी 60 वर्ष तक सेवा जारी रखने का कानूनी अधिकार नहीं जता सकते।

कर्मचारियों के लिए राहत

हाईकोर्ट ने अपने फैसलों में एक मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए यह भी स्पष्ट किया है कि जिन कर्मचारियों ने न्यायालय के अंतरिम आदेशों के चलते 58 वर्ष की आयु के बाद भी कार्य किया है, उन्हें उस अवधि के दौरान किए गए कार्य का वेतन, पेंशन और अन्य देय सेवा लाभों से वंचित नहीं किया जाएगा।

राज्य सरकार के इस कदम को सेवा नियमों में एकरूपता लाने और न्यायिक फैसलों के अनुपालन की दिशा में एक सख्त कदम के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों को इन निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button