लद्दाख प्रशासन का ऐतिहासिक फैसला: 23 विरासत स्थल ‘संरक्षित स्मारक’ घोषित
चीन शैल-चित्रों, बौद्ध मठों और किलों को अब मिलेगा पूर्ण कानूनी और वैधानिक संरक्षण

31 जुलाई, लेह/जम्मू: लद्दाख की समृद्ध पुरातात्विक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में प्रशासन ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में बढ़ते अनियंत्रित पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास के खतरों को देखते हुए 23 प्रमुख विरासत स्थलों को आधिकारिक तौर पर “संरक्षित स्मारक” घोषित कर दिया गया है।

लद्दाख के उपराज्यपाल ने इस महत्वपूर्ण अधिसूचना को मंजूरी देते हुए इसे लद्दाख की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा मील का पत्थर बताया है।
23 historic sites across Ladakh officially declared as “Protected Monuments” pic.twitter.com/GuhOCGqPQn
— All India Radio News (@airnewsalerts) July 30, 2026
इन प्रमुख धरोहरों को मिलेगी सुरक्षा
यह पूरी कवायद ‘जम्मू-कश्मीर प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम’ के प्रावधानों के तहत की गई है। इसके तहत अब इन स्थलों को पूर्ण वैधानिक और कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा। इन 23 चिह्नित धरोहरों में शामिल हैं:

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प्रागैतिहासिक शैल-चित्र (Petroglyphs): लद्दाख के डोमखर, लेहडो, अलची, मुर्गी और शार्नोस में स्थित प्राचीन चट्टानों पर उकेरी गई आकृतियां।

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धार्मिक और ध्यान स्थल: श्ये (Sindhu Ghat) के पास स्थित प्रसिद्ध ‘मैत्रेय बुद्ध’ की शैल नक्काशी, हुंडर में ओनपो की मेडिटेशन (ध्यान) गुफा और सासपोल की प्राचीन गुफाएं।
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प्राचीन किले और मठ: तिंगमोसगंग किला, सूमूर किला और प्रसिद्ध स्तोंगडे गोम्पा (बौद्ध मठ)।

फैसले का क्या असर होगा?
इस आधिकारिक घोषणा के बाद अब प्रशासन इन महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों के वैज्ञानिक संरक्षण और जीर्णोद्धार (Restoration) का काम व्यवस्थित रूप से शुरू कर सकेगा। इन क्षेत्रों में:
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किसी भी प्रकार के अवैध अतिक्रमण पर पूरी तरह रोक लगेगी।
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स्मारकों के मूल ढांचे को नुकसान पहुंचाने वाली बाहरी या व्यावसायिक गतिविधियों को पूरी तरह नियंत्रित किया जाएगा।
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भावी पीढ़ियों के लिए इन स्थलों के मूल ऐतिहासिक स्वरूप को वैसे ही बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण किया जाएगा।
उपराज्यपाल का बयान:
“लद्दाख के प्राचीन मठ, किले, गुफाएं और शैल-चित्र हमारी समृद्ध सभ्यतागत विरासत और सांस्कृतिक पहचान की अनमोल मिसालें हैं। इनका संरक्षण केवल पत्थरों या स्मारकों की रक्षा करना नहीं है, बल्कि हमारे लोगों की साझी यादों को भविष्य के लिए सुरक्षित रखना है।”
लद्दाख प्रशासन सिंधु नदी के तट पर देश का पहला पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क भी स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि इन प्रागैतिहासिक कलाकृतियों को सुरक्षित रखते हुए जिम्मेदार सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके।




