संकट में सरकारी स्कूल: 10 वर्षों में बंद हुए 94,000 विद्यालय, नीति आयोग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
पिछले एक दशक में सरकारी स्कूलों के नामांकन में आई 2.26 करोड़ की भारी कमी, आधे से अधिक बच्चे निजी संस्थानों की ओर बढ़े

3 अगस्त, दिल्ली: एक तरफ जहां देश में शिक्षा के स्तर को सुधारने और साक्षरता दर को बढ़ाने के लिए लगातार कई अभियानों पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी शिक्षा के मोर्चे पर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। नीति आयोग की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में देश भर में लगभग 94,000 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं।
यदि इसका दैनिक औसत निकाला जाए, तो देश में हर दिन औसतन 25 सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं। यह आंकड़ा देश के सार्वजनिक शिक्षा ढांचे की वर्तमान स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सरकारी स्कूलों में लगातार घट रहा है नामांकन
स्कूलों के बंद होने का सीधा असर बच्चों के नामांकन (Enrolment) पर भी देखने को मिला है। द हिन्दू (The Hindu) द्वारा साझा की गई रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक:
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नामांकन में भारी गिरावट: पिछले 10 वर्षों में सरकारी स्कूलों में बच्चों के नामांकन में 2.26 करोड़ की भारी कमी दर्ज की गई है।
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हिस्सेदारी में कमी: कुल नामांकन में सरकारी स्कूलों की हिस्सेदारी जो साल 2005 में 71% थी, वह शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में घटकर मात्र 49.24% रह गई है। यानी अब आधे से अधिक बच्चे निजी या अन्य गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों का रुख कर रहे हैं।
A recent NITI Aayog report said some 94,000 government schools were closed over the past decade, an average of 25 a day, contributing to a 2.26 crore decline in government school enrolment. The government schools’ share of total enrolment has fallen from 71% in 2005 to 49.24% in… pic.twitter.com/PH8Di0r7Xf
— The Hindu (@the_hindu) August 3, 2026
सार्वजनिक शिक्षा तंत्र के समक्ष चुनौतियाँ
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी स्कूलों के बंद होने और बच्चों की संख्या घटने के पीछे कई बुनियादी कारण काम कर रहे हैं:
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बुनियादी सुविधाओं का अभाव: कई ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के सरकारी स्कूलों में आज भी अच्छे कमरों, बिजली, साफ पानी और शौचालयों जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई है।
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शिक्षकों की कमी और रिक्त पद: स्कूलों में स्वीकृत पदों के खाली होने या शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण पढ़ाई का स्तर लगातार प्रभावित हो रहा है।
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निजी स्कूलों की तरफ बढ़ता रुझान: सरकारी व्यवस्था में गुणवत्ता की कमी के चलते मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग के अभिभावक भी भारी खर्च उठाकर अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भेजने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
सार्वजनिक शिक्षा के इस तरह सिमटने से गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों के लिए आने वाले समय में बुनियादी शिक्षा हासिल करना और भी मुश्किल हो सकता है। शिक्षाविदों का मानना है कि यदि इस गिरावट को तुरंत नहीं रोका गया, तो यह देश के मानव संसाधन विकास और भविष्य की प्रगति के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।



