India-Japan Relations: भारत और जापान के बीच नई रणनीतिक साझेदारी: रक्षा, तकनीक और ऊर्जा के क्षेत्र में ऐतिहासिक समझौते
नई दिल्ली में आयोजित 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में रक्षा सह-विकास और आर्थिक सुरक्षा पर बड़ा निर्णय

2 जुलाई, नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाची के बीच गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाने के लिए कई ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी पहलों का अनावरण किया। यह बैठक विशेष रूप से रक्षा, आर्थिक सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित रही।
प्रमुख समझौते और पहल
शिखर वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयानों और समझौतों में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु शामिल हैं:
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रक्षा और सैन्य सहयोग: भारत और जापान ने रक्षा क्षेत्र में अपने पहले सह-विकास (co-development) समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत, दोनों देश मिलकर ‘नौसैनिक रेडियो एंटीना’ (naval radio antenna) सहित सैन्य हार्डवेयर विकसित करेंगे। यह समझौता भविष्य में रक्षा तकनीक और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी का एक नया अध्याय खोलेगा।
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आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला: दोनों देशों ने ‘आर्थिक सुरक्षा’ के लिए एक साझा रोडमैप तैयार किया है। इसके माध्यम से सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक और उन्नत सामग्रियों (advanced materials) जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती पर जोर दिया जाएगा।

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): भारत और जापान ने AI के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक संयुक्त बयान जारी किया है। पीएम मोदी ने कहा कि जापान की ‘प्रिसिजन टेक्नोलॉजी’ (precision technology) और भारत की ‘सॉफ्टवेयर क्षमताओं’ का मिलन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा में एक नई गति प्रदान करेगा।
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स्वच्छ ऊर्जा और बायोगैस पहल: ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, ‘भारत-जापान बायोगैस पहल’ शुरू की गई है। इसके तहत भारत में 1,000 बायोगैस और जैविक खाद संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे ग्रामीण आजीविका और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।
निवेश और व्यापारिक लक्ष्य
इस शिखर सम्मेलन के दौरान जापान की ओर से भारतीय बाजार में भारी निवेश की प्रतिबद्धता जताई गई है। लगभग 150 से अधिक जापानी कंपनियां 12.5 बिलियन डॉलर के निवेश के साथ विभिन्न परियोजनाओं में भाग ले रही हैं। दोनों देशों का लक्ष्य अगले 10 वर्षों में जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन का निवेश प्राप्त करना और भारत में कार्यरत जापानी कंपनियों की संख्या को दोगुना करना है।

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बयान में कहा, “आज की वैश्विक अनिश्चितता के दौर में, आपसी विश्वास भारत और जापान के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक संपत्ति है।” उन्होंने भारत की ‘विकसित भारत 2047’ की परिकल्पना और जापान की तकनीकी विशेषज्ञता को एक-दूसरे के पूरक के रूप में रेखांकित किया।

भविष्य की राह
भारत और जापान 2027 में अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहे हैं। इस शिखर सम्मेलन ने एक ‘मुक्त, समृद्ध और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक’ क्षेत्र सुनिश्चित करने के साझा दृष्टिकोण को और मजबूत किया है।
रक्षा से लेकर तकनीक और ऊर्जा से लेकर व्यापार तक, यह सम्मेलन भारत और जापान के बीच ‘विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ को एक ठोस और व्यावहारिक आधार प्रदान करता है, जो न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।






