NEET पेपर लीक: पीएम मोदी के आश्वासन के बाद सोनम वांगचुक ने 26 दिनों का अनशन तोड़ा
गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में जूस पीकर समाप्त की भूख हड़ताल; देशवासियों से शांति की अपील

24 जुलाई, नई दिल्ली/गुरुग्राम: नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों के बाद अपनी भूख हड़ताल आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दी है। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती वांगचुक ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री (PMO) डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में जूस पीकर अपना अनशन तोड़ा।
#BREAKING: Activist Sonam Wangchuk has ended his hunger strike at Medanta Hospital in Gurugram after Prime Minister Narendra Modi’s statement in presence of Union Minister JP Nadda and MoS PMO Dr. Jitendra Singh. pic.twitter.com/astotpo3gY
— Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) July 23, 2026
पीएम मोदी के आश्वासन के बाद लिया फैसला
सोनम वांगचुक ने यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आश्वासन के बाद उठाया है जिसमें पीएम ने पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। अनशन टूटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर वांगचुक के जल्द स्वस्थ होने की कामना की और उन्हें डॉक्टरों की सलाह मानकर जल्द से जल्द अपना वजन सामान्य करने का आग्रह किया।
देश भर के लोगों से शांति की अपील
भूख हड़ताल खत्म करने के बाद सोनम वांगचुक ने X पर लिखा:
“केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा, डॉ. जितेंद्र सिंह और लेह-लद्दाख एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में मैंने 26 दिनों के बाद आखिरकार अपना अनशन समाप्त कर दिया है। सरकार के साथ लंबी बातचीत और देश में संभावित हिंसा की स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।”
इसके साथ ही उन्होंने आंदोलन से जुड़े सभी छात्रों और देशवासियों से किसी भी प्रकार की हिंसा से दूर रहने और पूर्ण रूप से शांति बनाए रखने की अपील की है।
28 जून से चल रहा था अनशन
वांगचुक परीक्षा प्रणाली में सुधार और कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे थे। इस दौरान तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें पहले सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था, जहां से दिल्ली हाई कोर्ट की अनुमति के बाद उन्हें बेहतर निगरानी के लिए मेदांता अस्पताल शिफ्ट किया गया था। डॉक्टरों के मुताबिक, भूख हड़ताल के कारण उनके शरीर का वजन करीब 11 किलोग्राम तक घट गया है।




